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बुधवार, 1 अप्रैल 2026

कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़, 6 डॉक्टर समेत 10 पर कार्रवाई


 

कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़, 6 डॉक्टर समेत 10 पर कार्रवाई

कानपुर,चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाले एक बड़े किडनी रैकेट का कानपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के निर्देश पर डीसीपी वेस्ट एवं एसीपी कल्याणपुर के नेतृत्व में रावतपुर थाना पुलिस और सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया।
पुलिस जांच में सामने आया कि शहर के 'आहूजा' हॉस्पिटल, 'प्रिया' हॉस्पिटल, 'मेड लाइफ' हॉस्पिटल और 'आरोही' हॉस्पिटल में गोपनीय तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का अवैध धंधा चल रहा था। पुलिस ने इन अस्पतालों के संचालक डॉक्टरों समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि 4 अन्य संचालक डॉक्टर अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
टेलीग्राम ऐप से चलता था रैकेट
गिरोह टेलीग्राम ऐप के जरिए डोनर (किडनी देने वाला) और रिसीवर (किडनी लेने वाला) के बीच सौदेबाजी करता था।
बिहार के एक एमबीए छात्र को डोनर और मेरठ की एक महिला को रिसीवर बनाकर ट्रांसप्लांट की तैयारी की जा रही थी।
आठवीं पास एम्बुलेंस चालक शिवम अग्रवाल खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों को जाल में फंसाता था और पूरा नेटवर्क चलाता था।
बंद कर दिए जाते थे सीसीटीवी
डॉ. रोहित ही ऑपरेशन का दिन और समय तय करते थे। सभी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन रात के समय ही किए जाते थे। डॉ. रोहित अपने साथ डॉ. वैभव, डॉ. अनुराग, डॉ. अफजल समेत 4-5 अन्य स्टाफ के साथ आते थे। उनके अस्पताल आने से पहले हॉस्पिटल के सारे सीसीटीवी को बंद कर दिया जाता था।साथ ही ऑपरेशन के दिन हॉस्पिटल के रेगुलर स्टॉफ की छुट्टी कर दी जाती थी। इस दौरान डॉ. रोहित की टीम के अलावा और कोई भी हॉस्पिटल में नहीं रहता था।
आर्थिक लेन-देन का खुलासा:
पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह गरीब और मजबूर लोगों को 3 से 4 लाख रुपये का लालच देकर किडनी निकलवाता था और फिर उसी किडनी को जरूरतमंद अमीर मरीजों को 50 से 60 लाख रुपये में बेचता था। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक इस गिरोह ने शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों में अब तक 40 से 50 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कराए हैं।
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने कहा कि यह मानव अंग तस्करी का गंभीर मामला है। सभी गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (THOA) और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। फरार डॉक्टरों की तलाश जारी है और अस्पतालों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

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