वन नेशन वन इलेक्शन को मिली कैबिनेट की मंजूरी, शीतकालीन सत्र में पेश होगा बिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली कैबिनेट ने भारत में 'वन नेशन वन इलेक्शन' के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट ने बुधवार को हुई बैठक में देश में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी. भाजपा के घोषणा पत्र में भी इसका जिक्र है।
वन नेशन वन इलेक्शन पर विचार के लिए बनाई गई पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट 18 हजार 626 पन्नों की है।
पैनल का गठन 2 सितंबर 2023 को किया गया था। यह रिपोर्ट स्टेकहोल्डर्स-एक्सपर्ट्स से चर्चा के बाद 191 दिन की रिसर्च का नतीजा है। कमेटी ने सभी विधानसभाओं का कार्यकाल 2029 तक करने का सुझाव दिया
आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते थे. इसके बाद 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गई. उसके बाद 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई. इससे एक साथ चुनाव की परंपरा टूट गई.
भारत में 2029 में लोकसभा चुनाव में सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है। 2002 के परिसीमन कानून में 2026 तक लोकसभा की सीटें बढ़ाने पर रोक लगी हुई है, लेकिन 2027 में होने वाली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने में कोई समस्या नहीं होगी।
इससे 2002 के परिसीमन कानून में संशोधन के बिना ही 2029 के पहले परिसीमन का रास्ता साफ हो जाएगा। 2008 में लोकसभा की सीटों का परिसीमन किया गया था, जिसमें जनसंख्या वितरण के आधार पर सीटों का परिसीमन किया गया था।
नई व्यवस्था में लगभग साढ़े सात सौ सीटों पर लोकसभा चुनाव हो सकता है। लोकसभा सीटों को बढ़ाने में सबसे ज्यादा पेंच दक्षिण के राज्यों के विरोध का है, जिनकी सीटें जनसंख्या वृद्धि दर पर सफलतापूर्वक अंकुश लगाने के कारण कम हो सकती हैं।

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