पेरिस में अन्याय नहीं, न्याय हुआ है...
देश और कुश्ती के साथ दगाबाजी की कहानी आज से 5 महीने पहले 11 मार्च को लिखी गई थी।
उस दिन हुए ट्रायल में विनेश फोगाट 53 किग्रा के मुकाबले में एक नौजवान अनजान पहलवान अंजू से तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर 0-10 से, यानि बुरी तरह हार गई थी। तो उसने 50 किग्रा के मुकाबले में ट्रायल देने की जिद्द शुरू कर दी थी।50 किग्रा वर्ग की महिला पहलवानों ने इसका विरोध किया था। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) के अनुच्छेद 7 के अनुसार एक प्रतियोगी को एक दिन में एक ही भार वर्ग में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन विनेश ने 3- 4 घंटे तक ट्रायल नही होने दिया और जब एडोहॉक कमेटी से लिखित में ले लिया कि वह दो भार वर्ग में ट्रायल दे सकती है तभी ट्रायल शुरू हो पाए थे। विनेश उसी दिन दो अलग-अलग भार वर्गों में ट्रायल में शामिल हुई।
जबरिया कम वर्ग का ट्रायल देकर उन कम वजन की महिला पहलवानों को किसी तरह हरा कर ये पेरिस गई थी। वहां भी इसका मुकाबला 50 किग्रा या उससे कम वजन वाली पहलवानों से हुआ। जुगाड़ से कुछ देर वजन कम करने का हथकंडा सफल हुआ और ये जीतती गई। लेकिन फ़ाइनल में इस हथकंडे की पोल खुल गई। कुश्ती और खेल के साथ की जा रही दगाबाजी की धज्जियां उड़ गईं। वास्तविकता यह है कि ये पहलवान तो 53 किग्रा वजन की ही थी। जिसमें यह ट्रायल में ही हार चुकी थी। इन तथ्यों की पुष्टि के लिए उसी दिन 11 मार्च की खबर की कटिंग और उसी दिन एक खेल प्रेमी द्वारा किए गए ट्वीट के स्क्रीन शॉट साझा कर रहा हूं।
तो खैरातियों के रण्डी रोने के पाखंड में बिल्कुल मत फंसिए।
दरअसल पेरिस में अन्याय नहीं हुआ, बल्कि पटियाला के स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के SAI सेंटर में 11 मार्च को 50 किग्रा वजन वर्ग की देश की उदीयमान नौजवान महिला पहलवानों के हक़ की सरेआम लूट का जो अन्याय हुआ था तथा पेरिस में भी इस "वजन" वर्ग की ठगी और दगाबाजी का शिकार होकर हारीं अन्य देशों की महिला पहलवानों की बद्दुआ लगी, उनको न्याय मिला सच सामने आया। उन सभी महिला पहलवानों के साथ हुई ठगी का दंड ईश्वर ने दिया।
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