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महिलाओं का खतना रिवाज है या फिर बेरहमी ?
हर साल 6 फरवरी को इंटरनेशनल डे ऑफ जीरो टॉलरेंस फॉर फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन मनाया जाता है।
जब भी महिला सशक्तिकरण की बात होती है तो कई तरह की बातें कही जाती हैं जैसे कि महिलाओं को समान अधिकार मिलने चाहिए, महिलाओं की सुरक्षा लिए सही तरह की व्यवस्थाएं होनी चाहिए आदि, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि उन पर कई ऐसे अत्याचार होते हैं जिन्हें रिवाज का नाम दे दिया जाता है।
भारत में भी जारी है ये कुप्रथा
2017 में बोहरा मुस्लिम समुदाय की कुछ महिलाओं ने प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर इस कुप्रथा के बारे में जानकारी दी थी और इसे रोकने के लिए मुहिम चलाई थी। ये कुप्रथा भारत में भी जारी है और ये बहुत ही ज्यादा खराब है। जिस तरह के दर्द से लड़कियां गुजरती हैं उसका अंदाजा भी आपको नहीं हैं।
ये बात सोचने वाली है कि दुनिया भर में इसे लेकर मुहिम चलाई जा रही है और फिर भी इस प्रथा को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं है।
क्या है महिलाओं का खतना?
आप में से कई लोगों को इसके बारे में सुनकर ही अजीब लग रहा हो। ये वाकई बहुत क्रूर और अमानवीय प्रक्रिया होती है जिसमें बहुत कुछ किया जाता है।
महिलाओं का खतना उसी तरह से होता है जिस तरह से पुरुषों का खतना होता है। छोटी लड़कियों के प्राइवेट पार्ट को ब्लेड या फिर उस्तरे से थोड़ा सा काट दिया जाता है। इसे धार्मिक रिवाज का नाम दिया जाता है और भारत सहित दुनिया के कई देशों के कई धर्मों में इस रिवाज को आज भी फॉलो किया जाता है। दरअसल, फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन एक बहुत ही दर्दनाक प्रक्रियाहै जिससे लड़कियों को बेहद दर्दनाक हालात से गुजरना पड़ता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार तो अफ्रीका और एशिया ही नहीं बल्कि यूरोप के भी 30 ऐसे देश हैं जहां अभी भी इस तरह की प्रैक्टिस होती है।
आखिर क्यों किया जाता है खतना?
इसे कई देशों में धार्मिक रिवाज का नाम दिया जाता है। अफ्रीका के कई देशों में तो ये काफी ज्यादा प्रचलित है। कई इस्लामिक देशों में भी ये प्रचलित है। ऐसा समझा जाता है कि इससे लड़कियों की यौन इच्छाएं खत्म हो जाती हैं।
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