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शनिवार, 18 फ़रवरी 2023

राष्ट्रवादी मोदी से लड़ने के लिए जॉर्ज सोरोस खर्च करेगा 100 करोड़, क्यों ली मोदी के नाम की सुपारी?

 



राष्ट्रवादी मोदी से लड़ने के लिए  जॉर्ज सोरोस खर्च करेगा 100 करोड़, क्यों ली मोदी के नाम की सुपारी?

कांग्रेस के गांधी परिवार के साथ घनिष्ठ संबंधों वाले हर्ष मंदर

प्रतिबंध से बौखलाया सोरोस

बैंक ऑफ़ इंग्लैंड को घुटने टेकने पर मजबूर किया

जॉर्ज सोरोस और बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और गैर सरकारी संगठनों का नेटवर्क

भारत के खिलाफ जॉर्ज सोरोस का षड्यंत्र

विश्व के सबसे विवादित चेहरों में से एक-जॉर्ज सोरोस, कुछ के लिए इतिहासपुरूष, फाइनेंसियल गुरु और एक सफल निवेशक, एक अरबपति जो बाजारों को स्थानांतरित करने में सक्षम हैं। एक आदमी जो राजनीति और राय को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता हैं।

लगभग 92 साल की उम्र में कोई भी व्यक्ति क्या करता है? काम धंधा छोड़कर ईश्वर की भक्ति में समय लगाता है। नाती-पोतों के साथ खुश रहने का प्रयास करता है। लेकिन करीब 92 साल की उम्र में चेहरे पर पड़ी झुर्रियां और लड़खड़ाती आवाज वाले एक व्यक्ति का सपना भारत और सनातन सभ्यता को नष्ट करना। भारत ही नहीं जार्ज सोरोस का शौक हर उस देश को तबाह करना है जहां पर मानवता के लिए कुछ भी अच्छा हो रहा हो। अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर क्रोनी कैपटलिज्म को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी से मधुर संबंध हैं। दोनों का भाग्य आपस में जुड़ा है। वैसे आपको बता दें कि ये कोई पहला मौका नहीं है जब सोरोस ने पीएम मोदी को निशाना बनाया हो। इससे पहले 2020 में जॉर्ज सोरोस ने कहा था कि मोदी के नेतृत्व में भारत तानाशाही व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। जार्ज सोरोस के पास अरबों डॉलर की संपत्ति है। जिसके दम पर वो अब तक दुनिया के कई देशों को  बर्बादी के रास्ते पर ले जा चुका है। लेकिन इतने समय बाद भी बहुत लोग उसका नाम तक नहीं जानते। कई देशों को तो पता तक नहीं है कि उनकी बर्बादी के पीछे इसी व्यक्ति का हाथ है। सोरोस का नाम उस  टूलकिट में भी था जिसे ग्रेटा थनबर्ग ने गलती से ट्वीट कर दिया था। 

कांग्रेस के गांधी परिवार के साथ घनिष्ठ संबंधों वाले हर्ष मंदर
ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से जुड़े रहे हैं। मंदर ने जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन द्वारा स्थापित अंतर्राष्ट्रीय अनुदान देने वाले नेटवर्क के सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य किया। हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों को भड़काने में उनकी भूमिका, विशेष रूप से दिसंबर 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया परिसर के आसपास की हिंसा, पिछले कुछ समय से जांच के दायरे में है। बाद में उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर हिंसा भड़काने के आरोप में भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और कपिल मिश्रा की गिरफ्तारी की मांग की थी। सोरोस के योगेंद्र यादव से भी संबंध हैं। 2006 में सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज में प्रोफेसर के रूप में यादव ने पहली बार भारत आए सोरोस के सामने स्टेट ऑफ डेमोक्रेसी इन साउथ एशिया अध्ययन प्रस्तुत किया था। 
प्रतिबंध से बौखलाया सोरोस
2016 में ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन को भारत सरकार द्वारा निगरानी सूची में रखे जाने से उसे एक बड़ा झटका लगा। जिसके बाद ये साफ हो गया कि किसी भी संगठन को सीधे फंड नहीं दे सकती थी। परिणामस्वरूप, 2016 से OSF को भारत में FCRA पंजीकृत संगठनों को पैसा भेजने के लिए गृह मंत्रालय से पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता है।
बैंक ऑफ़ इंग्लैंड को घुटने टेकने पर मजबूर किया
16 सितंबर 1992 में सोरोस द्वारा ब्रिटिश पाउंड को कमज़ोर करना विदेशी मुद्रा पर उनकी सबसे आश्चर्यजनक सफलता बन गई। ब्रिटेन मुद्रा संकट ब्लैक वेडनसडे के दौरान उनके एक बिलियन डॉलर बनाने के बाद वो “उस आदमी जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड को कड़का बना दिया” के तौर पर पूरी दुनिया में मशहूर हो गए। लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि सोरस सिर्फ करेंसी ही नहीं पूरे सिस्टम को भी ध्वस्त करने में सक्षम हैं। 
जॉर्ज सोरोस और बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और गैर सरकारी संगठनों का नेटवर्क
गैर सरकारी संगठनों के अपने नेटवर्क के माध्यम से, जॉर्ज सोरोस ने बुद्धिजीवियों के एक वर्ग को विकसित किया है जो भारतीय राज्य, विशेष रूप से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी सरकार का विरोध करने की दिशा में काम करते हैं। यह सब 1995 में शुरू हुआ जब जॉर्ज सोरोस ने मीडिया डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट फंड की स्थापना कर अपनी ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के माध्यम से, जिसने 1999 में भारतीय संस्थानों में अध्ययन और अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए छात्रवृत्ति और फैलोशिप की पेशकश करके भारत में अपना संचालन शुरू किया। परोपकारी गतिविधियों को चलाने के नाम पर सोरोस के नेतृत्व में वामपंथी अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने भारत के भीतर के सक्रिय भारत विरोधी तत्वों को समर्थन देकर देश भर में अपना जाल फैलाना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दशकों में जॉर्ज सोरोस ने समय-समय पर भारत में राष्ट्रवादी सरकार के खिलाफ प्रोपोगेंडा फैलाने का काम किया। 2008 में, सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड ने निवेश को बढ़ावा देने के लिए अपने 17 मिलियन फंड लॉन्च करने के लिए ओमिडयार नेटवर्क, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) और गूगल डॉट ओ आर्जी के साथ हाथ मिलाया था।  अन्य नेटवर्क के साथ, सोरोस ने पॉलिटिकल नैरेटिव सेट करने के लिए मीडिया को व्यापक अनुदान प्रदान किया है।
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भारत के खिलाफ जॉर्ज सोरोस का षड्यंत्र
WEF में दिए गए अपने बहुप्रचारित भाषण में सोरोस ने अपने विचारों से दुनिया को अवगत कराया जब उन्होंने उभरते हुए राष्ट्रवाद को खुले समाज का सबसे बड़ा दुश्मन बताया। जॉर्ज सोरोस जिसने  भारत को हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ता हुआ बताया था। जॉर्ज सोरोस ने वर्ष 2020 ने मोदी सरकार को भारत के लिए खतरा बताया था। सोरोस ने अपने प्रभाव का उपयोग करके और भारत की सड़कों पर अराजकता पैदा करने की कोशिश करके अंतर्राष्ट्रीय प्रेस में भारत सरकार विरोधी आख्यान को प्रचारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 






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