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गुरुवार, 23 मार्च 2023

बकवास अध्यादेश बता मनमोहन सिंह वाला अध्यादेश न फाड़ा होता तो आज नहीं आती ये नौबत

 

बकवास अध्यादेश बता मनमोहन सिंह वाला अध्यादेश न फाड़ा होता तो आज नहीं आती ये नौबत
सूरत की एक अदालत ने 'मोदी उपनाम' संबंधी टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ 2019 में दर्ज आपराधिक मानहानि के एक मामले में उन्हें दो साल कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने राहुल गांधी को जमानत भी दे दी और उनकी सजा पर 30 दिन की रोक लगा दी, ताकि कांग्रेस नेता उसके फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकें। फैसला सुनाए जाते समय राहुल गांधी अदालत में मौजूद थे। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के वकील बाबू मंगुकिया ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एच एच वर्मा की अदालत ने कांग्रेस नेता को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 499 और 500 के तहत दोषी करार दिया। ये धाराएं मानहानि और उससे संबंधित सजा से जुड़ी हैं।

राहुल ने उस अध्‍यादेश को 'पूरी तरह बकवास' करार दिया था
कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने दागी नेताओं को बचाने के लिए लाए गए अध्‍यादेश पर बयान देकर यूपीए सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। राहुल ने उस अध्‍यादेश को 'पूरी तरह बकवास' करार दिया है जिसे पीएम मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली कैबिनेट ने मंजूरी दी है। उन्‍होंने यहां तक कह दिया कि ऐसे अध्‍यादेश को फाड़ कर फेंक देना चाहिए। राहुल के इस बयान पर बीजेपी महासचिव वरुण गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को विदेश से लौटते ही इस्‍तीफा दे देना चाहिए।
पीएम के पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू ने भी कहा था
राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए और मनमोहन सिंह को इस्‍तीफा दे देना चाहिए। हालांकि, अमेरिका दौरे पर गए मनमोहन सिंह ने राहुल सिंह के बयान पर अपनी बात रखी है। उन्‍होंने कहा कि राहुल गांधी ने अध्‍यादेश के बारे में उन्‍हें लिखा है। पीएम ने कहा कि भारत लौटने पर वह राहुल गांधी की तरफ से उठाए गए मुद्दों पर कैबिनेट में चर्चा करेंगे।

10 साल पुराने अध्यादेश की क्यों हो रही चर्चा
साल 2013 के सितंबर महीने में यूपीए सरकार ने एक अध्यादेश पारित किया था। इसका मकसद उसी साल जुलाई महीने में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित एक आदेश को निष्क्रिय करना था। जिसमें अदालत ने कहा था कि दोषी पाए जाने पर सांसदों और विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी जाएगी। कांग्रेस द्वारा इस अध्यादेश को लाए जाने पर बीजेपी, लेफ्ट और कई विपक्षी दलों ने यूपीए सरकार पर निशाना साधा था। मनमोहन सरकार पर उस वक्त भ्रष्टाचारियों को बढ़ावा देने के आरोप लगने लगे और कहा गया कि इसी मकसद के लिए ये अध्यादेश लाया गया। उसी वक्त आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव पर भी चारा घोटाले को लेकर अयोग्यता की तलवार लटक रही थी। कांग्रेस की ओर से जब ये प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई थी तो उस वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमेरिका के दौरे पर थे। इस घटना के बाद राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखकर अपना पक्ष रखा था। बाद में अक्टूबर महीने में तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस अध्यादेश को वापस ले लिया था।

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