अब महामारी की गंभीरता का खात्मा होने वाला है !
कोविड-19 इंडिया ट्रैकर तैयार करने वाली टीम के के प्रमुख और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पॉल केटुमैन ने भारत को बारे में बताया कि अगले तीन से चार हफ्तों में ओमीक्रॉन दुनियाभर में डेल्टा वेरिएंट की जगह ले लेगा. हालिया ट्रेंड बता रहा है कि उसके बाद रोज होने वाली मौतों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है. इसलिए भरोसा है कि अब महामारी की गंभीरता का खात्मा होने वाला है. ब्लूमबर्ग को भेजे एक जवाब में पॉल ने कहा कि भारत में भी कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं, लेकिन यह सिलसिला ज्यादा दिन तक नहीं चलेगा. कोविड-19 इंडिया ट्रैकर में भारत के 6 राज्यों को लेकर फिक्र जाहिर की गई है. स्टडी में दिन और हफ्तों के आधार पर अनुमान लगाया गया है|
कोरोना को खत्म करने के लिए प्राकृतिक व्यवस्था !
इजरायल के टॉप मेडिकल एक्सपर्ट एमडी अफ्साइन इमरानी ने भी अपनी रिसर्च में बढ़ते ओमीक्रॉन मामलों को नेचुरल कोरोना वैक्सीन की तरह माना है. उनका कहना है कि उनका कहना है कि अस्पताल में भर्ती नहीं होना, ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की जरूरत नहीं और गंभीरता कम होने से लोगों में मास हर्ड इम्यूनिटी डेवलप हो रही है. कोरोना महामारी को खत्म करने के लिए यह प्रकृति की व्यवस्था है. उन्होंने भरोसा जताया है कि अगले करीब तीन महीने में डेल्टा वेरिएंट पूरी तरह खत्म हो सकता है|
कोरोना महामारी का अंत होने की पूरी संभावना !
ब्रिटिश मेडिकल काउंसिल के पूर्व वैज्ञानिक डॉ राम एस उपाध्याय का इस बारे में कहना है कि ओमीक्रॉन संक्रमण के तेज फैलाव से डरें नहीं. इससे कोरोना महामारी का अंत तय होने की पूरी संभावना है. उन्होंने बताया कि ओमीक्रॉन वेरिएंट डेल्टा वेरिएंट से अलग है. डेल्टा फेफड़ों में जाकर संक्रमण फैलाना शुरू करता है, जबकि ओमीक्रॉन श्वासनली में रुककर मल्टीप्लीकेशन करता है. इसलिए फेफड़े बच जाते हैं. दूसरी अहम बात यह है कि ओमीक्रॉन जब फेफड़ों में जाता है तो डेल्टा के मुकाबले 10 गुना धीमी गति से फैलता है. इसलिए मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती|
डॉ राम एस उपाध्याय ने बताया कि दरअसल, हमारी श्वासनली में ‘म्यूकोसल इम्यून सिस्टम’ होता है, जो इम्यूनिटी सिस्टम का केंद्र होता है. यहां एक एंटीबॉडी बनता है, जिसे ‘इम्यूनोग्लोबुलिन आईजीए’ कहते हैं. ओमीक्रॉन यहीं मल्टीप्लीकेशन करता है. इसलिए एंटीबॉडी फौरन सक्रिय हो जाते हैं. इस वजह से ही मरीज जल्दी ठीक हो रहे हैं|
वैज्ञानिकों ने एक राहत भरी खबर दी है.
वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने उन एंटीबॉडी की पहचान की है, जो ओमिक्रॉन और कोरोनावायरस के अन्य वैरिएंट को बेअसर करने में सक्षम हैं. ये एंटीबॉडीज वायरस के उन हिस्सों को निशाना बनाती हैं जिनमें म्यूटेशन (जीन में बदलाव) के दौरान भी कोई बदलाव नहीं होता है.
नेचर जर्नल में पब्लिश हुई इस स्टडी से वैक्सीन (Vaccine) और एंटीबॉडी (Antibodies) के इलाज को डेवलप करने में मदद मिल सकती है, जो न केवल ओमिक्रॉन बल्कि भविष्य में कोरोनावायरस के अन्य वैरिएंट के खिलाफ भी प्रभावी रहेंगे. यानी अब अगर ओमिक्रॉन के बाद किसी और वैरिएंट का भी खतरा आता है तो इन एंटीबॉडीज के जरिए उनसे भी निपटा जा सकेगा.
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