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सोमवार, 7 सितंबर 2020

बॉलीवुड के इस्लामीकरण के नेक्सस को ध्वस्त करना चाहती है सरकार!

अमेरिका के टॉप 5 माफिया सरगनाओं में से एक नाम अल कपोन का है. न्यूयार्क में जन्म लेकर वहां अपराध शास्त्र का ककहरा सीख के अल कपोन ने क्राइम कैपिटल ऑफ वर्ल्ड के नाम से कुख्यात अमेरिका के शिकागो शहर में अपना ठिकाना बनाया था और कुछ वर्षो में ही उसका आपराधिक साम्राज्य इतना फैल गया था कि उसे क्राइम कैपिटल ऑफ वर्ल्ड शिकागो के अपराध जगत का बेताज बादशाह माना जाने लगा था. शातिर अल कपोन ने समाजसेवी की नकाब ओढ़कर गरीब आम जनता के मध्य अपनी छवि रॉबिनहुड की सी बना ली थी. इसलिए पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए बिना ठोस सबूत के उस पर सीधे हाथ डालना कठिन हो रहा था. अंततः अल कपोन के घर किसी आपराधिक कृत्य के लिए नहीं बल्कि इनकम टैक्स की जांच के लिए छापा मारा गया था. प्रथम दृष्टया लोगों ने और खुद अल कपोन ने भी इसे साधारण कार्रवाई ही समझा था. लेकिन इस इनकम टैक्स मामले की जांच के जरिए ऐसे सबूत और तथ्य एजेंसियों ने एकत्र किए थे कि इनकम टैक्स के साधारण समान्य मामले में हिरासत में लिए गए अल कपोन के अगले 9 साल कठोर कारावास में गुजरे थे और इस दौरान उसके आपराधिक साम्राज्य को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था. जेल से बाहर निकलते समय उसकी स्थिति इतनी बुरी हो चुकी थी कि लगभग डेढ़ वर्ष बाद उसकी मृत्यु हो गयी थी.

अमेरिका के माफिया साम्राज्य की सच्चाई सबसे पहले दुनिया के सामने उजागर करने वाले मारियो पूजो के कालजयी उपन्यास गॉडफादर तथा इसी नाम से उस किताब पर बनी कालजयी फिल्म गॉडफादर में भी अल कपोन का जिक्र आपको मिलेगा.
अल कपोन का जिक्र करूंगा कि उसने तथा उसके समर्थकों और विरोधियों ने भी इनकम टैक्स के छापे को हल्की फुल्की कार्रवाई
आज अपनी इस पोस्ट में अल कपोन की कहानी का अत्यन्त संक्षिप्त उल्लेख इसलिए क्योंकि सोशलमीडिया में तथा न्यूजचैनलों पर कुछ लोगों ने यह सवाल उछालना शुरू कर दिया है कि CBI को तो सुशांत सिंह राजपूत की संदेहास्पद मौत की जांच करनी थी फिर, उसके बजाय ड्रग्स के मामलों की जांच क्यों होने लगी, क्या यह किसी को बचाने के लिए किया जा रहा है.? अतः ऐसे मूर्खतापूर्ण सन्देह और सवालों का कचरा फैला रहे परम ज्ञानी पहले तो यह जान लें कि CBI और NCB की टीमें महाराष्ट्र में भी हैं. लेकिन इस मामले की जांच के लिए CBI की भारी भरकम SIT दिल्ली से बनाकर भेजी गयी है जिसमें सर्वश्रेष्ठ अधिकारियों को रखा गया है. NCB की टीम भी दिल्ली से ही आयी है और उसके मुखिया ने मुम्बई में ही डेरा डाल दिया है.
अतः इनदिनों सन्देह और सवालों के जाल में उलझे परम ज्ञानी यह भलीभांति समझ लें कि किसी को बचाने के लिए ऐसी तैयारी नहीं की जाती. यह काम तो मुम्बई पुलिस पहले ही कर चुकी थी.
लेकिन असलियत क्या थी यह ऊपर लिख जा चुका है
CBI अपने लक्ष्य से भटके नहीं इसीलिए ED और NCB को उसके साथ ही मैदान में उतार दिया गया है. अतः धैर्य से प्रतीक्षा करिए उस परिणाम की जो मेरे अनुसार सबको चौंकाएगा.


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