गज़ब का दिमाग है इस लड़की में। पहले ठाकरे खानदान को चैलेंज करके Y कैटेगरी की सिक्युरिटी ले ली और फिर इस सिक्युरिटी को टेस्ट करने के लिए उद्धव ठाकरे का "तू-तड़ाक" भी कर दिया।
सीनियर ठाकरे के ज़माने में एक बार बच्चन साहब ने यूपी से अपने लगाव के सम्बंध में दो शब्द कह दिए थे, इतने में ही मराठा प्राइड पर आँच आ चुकी थी। सीनियर ठाकरे ने शाम को मोटरसाइकिल पर अपने दो गुंडे भेजे और उनसे पेट्रोल बम बच्चन साहब के बंगले में फेंकवा दिए।बाबूजी के बेटे में इतना करेज कहाँ कि वो प्रोटेस्ट करते, अगले दिन मातोश्री गए और दंडवत होकर न्यौछावर दी और मामला सुलट गया।असल में इस परिवार की राजनीति उर्फ गुंडई करने की यही तरकीब रही है कि पहले किसी को बेतहाशा आतंकित कर दो और फिर उसे निर्भय रखने की कीमत वसूलो।
कंगना ने बेशक "जो उखाड़ना है, उखाड़ लो" का चैलेंज कर दिया हो, लेकिन यहाँ से भी डैमेज कंट्रोल हो सकता था। उन्हें भी वही तरीका अपनाना पड़ता, जो सोनू सूद ने अपनाया; जब वो प्रवासी मजदूरों के हीरो बन कर सीधे ऊधो को चुनौती दे रहे थे।
तब उनको मातोश्री से सम्मन मिला। बेबी पेंग्विन और डैडी पेंग्विन ने अकेले में उनको खोपचे में लिया, बाद में एक हैप्पी फोटो शूट और अब सोनू की दुकानदारी बढ़िया चल रही है।पर कंगना अपनी लड़ाई को यहाँ तक अपने बूते तक लेकर आई हैं, इसमें बेशक उनकी निजी एवँ राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ भी होंगी पर यह आसान नहीं था, जिनको मर्द कहा जाता है, वे भी इन बम्बईया गुंडों को सीधी चुनौती नहीं दे सके थे।
इसलिए आज अगर कंगना रनौत के पास केन्द्रीय सरकार की सुरक्षा नहीं होती तो अब तक ऊधो के गुंडे उन पर जानलेवा हमला कर चुके होते और बॉलीवुड में संदेश दे चुके होते कि ठाकरे से टकराने का अंजाम क्या होता है !
लेकिन इस ऐतिहासिक बेइज्जती के बाद दोनों बाप-बेटे सोच रहे होंगे कि इस पर मिट्टी कैसे डाली जाए, क्योंकि शिवसैनिक निरीह और लाचार लोगों से तो भिड़ सकते हैं, लेकिन ऑटोमेटिक राइफलधारी सीआरपीएफ के जवानों से नहीं, जबकि बतौर बॉडी गार्ड उन्हें बीते सत्तर सालों से फायर खोलने की जरूरत ही नहीं पड़ी है, वर्दी का खौफ़ ही काफ़ी है.
अरविंद शर्मा
हावड़ा

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