सोशल मीडिया पर सभी ने अलग अलग अंदाज में प्रधानमंत्री के इस वीडियो के मायने निकाले हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राष्ट्रीय पक्षी मोर के साथ अपना वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। इस वीडियो में प्रधानमंत्री अपने निवास में विभिन्न स्थान पर मोर को दाना खिलाते हुए नजर आ रहे हैं, मोर के साथ प्रधानमंत्री का ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब सराहा गया।साथ ही कविता भी पोस्ट की
भोर भयो, बिन शोर,
मन मोर, भयो विभोर,
रग-रग है रंगा, नीला भूरा श्याम सुहाना,
मनमोहक, मोर निराला.
रंग है, पर राग नहीं,
विराग का विश्वास यही,
न चाह, न वाह, न आह,
गूँजे घर-घर आज भी गान,
जिये तो मुरली के साथ
जाये तो मुरलीधर के ताज.
जीवात्मा ही शिवात्मा,
अंतर्मन की अनंत धारा
मन मंदिर में उजियारा सारा,
बिन वाद-विवाद, संवाद
बिन सुर-स्वर, संदेश
मोर चहकता मौन महकता
सोशल मीडिया पर सभी ने अलग अलग अंदाज में प्रधानमंत्री के इस वीडियो के मायने निकाले। इस बारे में प्रख्यात ज्योतिषाचार्य आरती पांडेय कहती हैं कि सनातन धर्म में मोर को दाना खिलाने के बड़े महत्वपूर्ण मायने होते है कब और क्यो खिलाया जाता है तथा किसी शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्ष द्वारा ऐसा किये जाने के अलग मायने होते है आस्थावान प्रधानमंत्री मोर को दाना खिलाता है तब इस बारे शास्त्र कहते हैं कि मोर शिवपुत्र वीर कार्तिकेय के वाहन हैं, और कार्तिकेय देवताओं के सेनापति है। वीर कार्तिकेय को सनातन धर्म में युद्ध का देवता माना जाता है।
ऐसे में ज्योतिष नजरिये से जब भी मोर को दाना खिलाने की सलाह दी जाती है तब कार्तिकेय स्वामी को प्रसन्न किया जाता है ताकि किसी बड़े एक्शन से पहले युद्ध देवता का साथ मिल सके। देव सेनापति मंगल ग्रह कार्तिकेय स्वामी की ऊर्जा के ही प्रतिनिधि हैं। ऐसे में ज्योतिष नजरिये से कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री का मोर को दाना खिलाना किसी बड़े एक्शन से पहले महादेव पुत्र कार्तिकेय का आशीर्वाद मांगना है। देश भी इस आस में है कि मोर को दाना खिलाकर प्रधानमंत्री को भगवान कार्तिकेय का आशीर्वाद मिले और जल्द किसी बड़े एक्शन से देश में कोरोना से पैदा हुई आर्थिक मंदी से शीघ्र छुटकारा दिलाने का आशीर्वाद मिलें


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