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शनिवार, 25 जुलाई 2020

हर आदमी कोरोना की वेक्सीन और वॉयरस है



राजेश शर्मा-
कोरोना वैक्सीन पर खास फोकस करने के साथ-साथ  अनुसंधानकर्ता  इस बात पर भी खास जोर दे रहे हैं  कि  वैक्सीन आने तक कोरोना को नियंत्रण में करने के उपाय खोजे जाएं ताकि मौतों की संख्या कम की जा  सके.
 वैज्ञानिक अब इस बात के  पुख्ता सबूत जुटा चुके हैं कि  मरीज को वेंटिलेटर तक जाने हैं की नौबत ही नहीं आने देनी चाहिए . इसके बजाय ऑक्सीजन सिलेंडर का जल्दी उपयोग शुरू कर देना चाहिए यानी कि सांस फूलने की नौबत आने पर तुरंत मरीज को ऑक्सीजन उपलब्ध कराना उसे वेंटिलेटर तक जाने की हालत से बचा सकता है. मोटी बात यह है कि अगर आरंभिक दौर में ही प्रभावी प्रबंधन किया जाए तो मरीजों की हालत बिगड़ने से रोकी जा सकती है. सच तो यह है कि अगर नियमों का अनुशासन से पालन किया जाए तो सिर्फ 5% मामलों में अस्पताल पहुंचने की नौबत आती है. उनमें से भी 2% को गंभीर इलाज की जरूरत पड़ती है. यह बात भी स्पष्ट हो चुकी है कि  कोरोना की चपेट में आने वाले तीन प्रमुख वर्ग हैं,  गरीब लोग,  सीनियर सिटीजन और वह लोग, जिन्हें कुछ अन्य गंभीर बीमारियां हैं.
वृद्ध लोगों के अलावा जिन लोगों को ज्यादा खतरा है,  उनमें मोटापा,  डायबिटीज,  दिल की बीमारी या किसी अन्य गंभीर बीमारी  से ग्रस्त व्यक्ति कोरोना की चपेट में आने के बाद दिक्कत में आ सकते हैं.  गौरतलब है कि दुनिया की लगभग 22% आबादी कम से कम एक गंभीर बीमारी से ग्रस्त है.  उम्र और स्वास्थ्य दो महत्वपूर्ण कारण भले ही हो लेकिन 30 से 50 साल की उम्र के लगभग 40% लोग भी इन बीमारियों के कारण कोरोना से खतरे  के दायरे में हैं 
अब तक बचाव का जो तरीका कारगर साबित हो रहा है, वह निजी तौर पर अपनाई जाने वाली सावधानी ही है.  इसमें मुंह पर मास्क, लगातार हाथ धोते रहना, सैनिटाइजर के इस्तेमाल की बात तो शुरू से हो रही है पर बंद क्षेत्र में या भीड़ वाली जगह पर ज्यादा देर रहना खतरा पैदा कर सकता है.  फोन के इस्तेमाल में भी सावधानी बरतें और गले पर जोर देने वाली अनावश्यक गतिविधियों जैसे कि चिल्लाने और गाने आदि से बचें.  ऐसे भारी व्यायाम से भी बचें, जिसमें सांस फूलने का खतरा हो. गौरतलब है कि इन गतिविधियों की वजह से नहीं बल्कि अपनी सांस को सुचारू करने के लिए आप बाहरी वातावरण से जोर से जो ऑक्सीजन खींचते हैं, कोरोना का खतरा उससे बढ़ता है.
व्यापक पैमाने पर टेस्टिंग और ट्रेसिंग करके व्यक्ति को अलग रखना अन्य दो महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं हैं.  सबसे बड़ी बात यह है कि एक बार कोरोना होने के बाद भी  दोबारा होने का खतरा बरकरार है.  हर समय इस  बात का ध्यान रखना जरूरी है कि 24 मार्च से लॉकडाउन में रहने के बाद अगले 2 महीनों में आपकी  कोरोना  में  रूचि भले ही कम हो गई हो लेकिन कोरोना की  रुचि आप में बरकरार रहेगी. 
लगभग उसी तरह, जैसे क्रिकेट में बल्लेबाज को हर गेंद पर आउट होने से बचना होता है लेकिन गेंदबाज को विकेट लेने के लिए एक ही  गेंद काफी है.

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