सोचने वाली बात है कि अगर ट्रस्ट के सचिव जेल भेजे गए तो ट्रस्ट के अध्यक्ष की जवाबदेही क्यों तय हुई, ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं उर्जा महकमे के प्रमुख सचिव और कद्दावर आईएएस आलोक कुमार, गौर करिए
1- एक गुमनाम शिकायत पर जुलाई में आईएएस आलोक कुमार ने जांच समिति गठित की थी, रिपोर्ट आयी 29 अगस्त को, पर प्रमुख सचिव ने तूल पकड़ने तक रहस्यमय चुप्पी साधे रखी.
2- दो साल पहले 17 मार्च को DHFLमें पहला निवेश हुआ, इसके बाद लगातार होता रहा, अनुमति किसने दी थी?
3-क्या चेयरमैन के संज्ञान में अनुमति थी तो फिर उनकी जवाबदेही क्यों तय नहीं की जाए?
4- अगर चेयरमैन के इतने बड़े निवेश की जानकारी नहीं तब तो नौकरशाही के इतिहास में वे सबसे घोर लापरवाह चेयरमैन माने जाने चाहिए, कार्यवाही तब भी बनती है?
5-ट्रस्ट की तीन साल तक बैठक नहीं होती है फिर भी ट्रस्ट के अध्यक्ष और एमडी रहे अफसरों को कोई फिक्र तक न हुई , कोई सवाल जवाब तक नहीं किए गए, आखिर क्यों?
यूं तो बीते दो दशकों से बड़ों तक कानून के लंबे हाथ नहीं पहुंच पा रहे थे लेकिन योगीराज में शुरू हुई कार्यवाही के सिलसिलों से बड़े मगरमच्छों के भी शिकंजे में आने की उम्मीदें जग गयी हैं.
ज्ञानेंद्र शुक्ला
वरिष्ठ पत्रकार

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