"खान सर का असली खेल: विवाद से पैसा, नफरत से फॉलोइंग?"
उत्तर प्रदेश से पलायित सोशल मीडिया पर 'खान सर' के नाम से प्रसिद्ध और पटना में कोचिंग संचालक फैजल खान इन दिनों अपने बयानों, शैक्षणिक योग्यताओं और कोचिंग संचालन के तरीकों को लेकर गंभीर चर्चाओं और विवादों के केंद्र में हैं।
पटना के शिक्षक खान सर, जिनका असली नाम फैजल खान है, ने भारत के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ किया है जो शिक्षा के इतिहास में सबसे काला अध्याय साबित हो सकता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाखों फॉलोअर्स रखने वाले इस शिक्षक पर आलोचकों और डोगरा समूहों सहित कई संगठनों द्वारा गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
नाम और शैक्षणिक योग्यता पर उठते सवाल
खान सर ने लंबे समय तक अपनी पहचान को लेकर रहस्य बनाए रखा था, जहां वे खुद को 'अमित सिंह' के नाम से पुकारे जाने की बात कहते थे। हालांकि, बाद में सामने आया कि उनका असली नाम फैजल खान है। सार्वजनिक मंचों पर उनके द्वारा किए गए शैक्षणिक दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने स्वयं को साइंस में पोस्ट-ग्रेजुएट, जियोग्राफी में एमए और आईआईएम अहमदाबाद से स्ट्रेटजिक मैनेजमेंट का कोर्स करने का दावा किया है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इसके कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अतिरिक्त, उनके करियर रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने सैनिक स्कूल, एआईईईई (इंजीनियरिंग), एनडीए या यूपीएससी जैसी किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा को उत्तीर्ण नहीं किया है, जिसके बावजूद वे देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा के लिए लाखों छात्रों को कोचिंग दे रहे हैं।
हालिया विवाद और कड़े बयान
हाल के महीनों में खान सर के कई वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर विवाद का कारण बने हैं:
पाकिस्तान पर बयान (मई 2025): एक वीडियो में उन्होंने पाकिस्तान की पूरी आबादी को लेकर बेहद सख्त और आक्रामक टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने वहां की जनता को सामूहिक रूप से 'आतंकवादी' करार दिया। विश्लेषकों का मानना है कि लाखों युवाओं को प्रभावित करने वाले एक शिक्षक द्वारा ऐसी भाषा का प्रयोग समझ विकसित करने के बजाय उत्तेजना फैलाने का काम करता है।
सामरिक और सैन्य सुझाव
एक अन्य वायरल वीडियो में उन्होंने भारत-पाकिस्तान संबंधों पर बात करते हुए सिंधु जल समझौते को रद्द करने, नेवल ब्लॉकेज करने और बिजली-तेल रिफाइनरियों पर हमले जैसे युद्धोन्मादी सुझाव दिए।
ऐतिहासिक टिप्पणियां (जुलाई 2025): जम्मू-कश्मीर के अंतिम शासक महाराजा हरि सिंह पर की गई उनकी एक टिप्पणी, जिसमें उन्होंने महाराजा को "लालची और स्वार्थी" कहा था, पर डोगरा समूहों, बजरंग दल और महाराजा के वंशजों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।
अन्य विवाद: उनके पुराने वीडियो में महिलाओं के बौद्धिक स्तर को लेकर की गई एक टिप्पणी में उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा: "लड़कियों का दिमाग घुटनों में होता है" जो एक शिक्षक के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य और महिला-विरोधी है।को महिला-विरोधी माना गया। इसके साथ ही, "चीन की दीवार अंतरिक्ष से दिखाई देती है" जैसी उनकी बात को वैज्ञानिक रूप से गलत पाया गया है, क्योंकि नासा और इसरो जैसी संस्थाएं स्पष्ट कर चुकी हैं कि यह अंतरिक्ष से दिखाई नहीं देती।
'विवाद और टीआरपी' का बिजनेस मॉडल?
आलोचकों और विश्लेषकों का आरोप है कि खान सर का पूरा फोकस एक विशिष्ट पैटर्न पर काम करता है, जिसे "विवाद से व्यूअरशिप और रेवेन्यू" का मॉडल कहा जाता है।
डेटा के अनुसार, जनवरी 2022 में आरआरबी एनटीपीसी परीक्षा विवाद के दौरान जब उन पर एफआईआर दर्ज हुई, तब उनके चैनल पर करीब 10 लाख नए फॉलोअर्स जुड़े। इसी तरह मई 2025 के बयान के बाद उनके वीडियो को 50 लाख से अधिक व्यूज मिले। हर बड़े विवाद के बाद उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कोचिंग सेंटर्स में छात्रों की संख्या में भारी उछाल देखा गया है।
मुख्यधारा की मीडिया बनाम डिजिटल शिक्षक
यूट्यूब शिक्षकों और कोचिंग संचालकों की इस कार्यशैली पर हाल ही में टेलीविजन पत्रकार अंजना ओम कश्यप द्वारा की गई तीखी टिप्पणी के बाद यह बहस और तेज हो गई है। खान सर द्वारा इस पर किए गए आक्रामक पलटवार ने डिजिटल शिक्षा जगत की आंतरिक सच्चाई, व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा और उनके नैतिक दायित्वों को एक बार फिर देश के सामने लाकर खड़ा कर दिया है।

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