दिल्ली खान मार्केट गैंग की जिमखान क्लब सैरगाह से विदाई
दिल्ली की सबसे चर्चित और विवादित संस्थाओं में गिने जाने वाले दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर केंद्र सरकार ने अब सख्त और कड़ा रुख कर लिया है। राजधानी के हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में स्थित इस क्लब को खाली कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अधिकारियों को 5 जून तक हर हाल में क्लब का नियंत्रण सरकार के अधीन लेने के निर्देश दिए हैं।
करीब 28 एकड़ में फैला यह प्रतिष्ठित क्लब प्रधानमंत्री आवास और कई महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों के बेहद नजदीक स्थित है। लंबे समय से यह क्लब सत्ता के गलियारों, बड़े कारोबारियों, पूर्व नौकरशाहों, वरिष्ठ वकीलों, मीडिया जगत और प्रभावशाली लॉबी के मेल-जोल का केंद्र माना जाता रहा है। इसी कारण इसे लेकर समय-समय पर पारदर्शिता, सदस्यता प्रक्रिया और सरकारी संपत्ति के उपयोग को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार अब इस पूरी जमीन और परिसर को अपने प्रत्यक्ष नियंत्रण में लेना चाहती है। सुरक्षा एजेंसियों ने भी इस क्षेत्र को अत्यंत संवेदनशील माना है, क्योंकि यहां देश के शीर्ष संवैधानिक और प्रशासनिक संस्थानों की गतिविधियां संचालित होती हैं। बताया जा रहा है कि क्लब परिसर खाली होने के बाद इसे राष्ट्रपति सचिवालय अथवा किसी अन्य सरकारी उपयोग के लिए विकसित किया जा सकता है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ दावों—जैसे विदेशी जासूसों की नियमित आवाजाही या विशेष वैचारिक समूहों के कब्जे—को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। लेकिन यह जरूर है कि क्लब के संचालन और सदस्यता को लेकर केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से लगातार निगरानी और प्रशासनिक हस्तक्षेप बढ़ा रही है।
राजधानी के सत्ता केंद्र में स्थित इस क्लब पर सरकार की कार्रवाई को केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि सत्ता और प्रभाव के पुराने नेटवर्क पर बड़ी चोट के रूप में भी देखा जा रहा है।

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