उत्तर प्रदेश के फिरोज़ाबाद जनपद में जिला सूचना अधिकारी (DIO) द्वारा जारी किए गए एक आदेश ने पत्रकारिता जगत और खासकर डिजिटल मीडिया से जुड़े लोगों को हैरान कर दिया है। आदेश के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति यूट्यूब के माध्यम से पत्रकारिता करता पाया जाता है और उसके चैनल पर 50,000 से कम सब्सक्राइबर हैं, तो उसके खिलाफ प्रेस एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्देश जिले के आधिकारिक मीडिया ग्रुप में साझा किया गया है, जिसमें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सभी पत्रकारों को यह सूचना दी गई है कि ऐसे यूट्यूब पत्रकारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिला सूचना अधिकारी नरेंद्र मोहन वर्मा ने इस आदेश की पुष्टि भी की है, जिससे इसकी गंभीरता और प्रशासनिक स्तर पर इसकी स्वीकृति स्पष्ट होती है।
इस आदेश के सामने आने के बाद डिजिटल मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारिता के मानकों को लेकर बहस शुरू हो गई है। मीडिया जगत के कई लोगों का कहना है कि किसी पत्रकार के यूट्यूब सब्सक्राइबर की संख्या के आधार पर उसकी पत्रकारिता की वैधता तय करना न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी उल्लंघन है। इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं, और लोग इसे तानाशाही रवैये का प्रतीक मान रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शासन या उच्च न्यायिक स्तर पर इस फैसले की समीक्षा होती है या नहीं।

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