बलात्कार की राजनीति: राष्ट्र के लिए शर्म की बात
हाल की घटनाओं ने देश में आक्रोश और विरोध की लहर पैदा कर दी है। अपराध की क्रूरता ने हमें स्तब्ध कर दिया है, और हमारे समाज के ताने-बाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह जघन्य कृत्य कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि एक बड़ी बीमारी का लक्षण है जो बहुत लंबे समय से फैल रही है।
मासूम लड़कियों के खिलाफ यौन अपराध बढ़ रहे हैं, और अब समय आ गया है कि हम इस घृणित प्रवृत्ति को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं। सामाजिक कार्यकर्ता मुक्ता गुप्ता कहती हैं, "बलात्कार की राजनीति सत्ता, पितृसत्ता और दंड से मुक्ति का एक जटिल जाल है।"
इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को सुधारों के एक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए जो यौन हिंसा के मूल कारणों को संबोधित करे। हमें सख्त कानूनों की आवश्यकता है, न्याय प्रणाली में सुधार करने की आवश्यकता है, और हमें अपने बच्चों को सहमति, सीमाओं और सम्मान के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता है।
आक्रोश का समय खत्म हो गया है; अब कार्रवाई का समय है। हम जूनियर डॉक्टर, हर पीड़ित और खुद के प्रति यह दायित्व रखते हैं कि हम ऐसा समाज बनाएं जो महिलाओं के जीवन, सम्मान और सुरक्षा को महत्व दे।
ब्रिज खंडेलवाल
वरिष्ठ पत्रकार

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