वक्फ बोर्ड पर भू-माफिया की तरह काम करने का आरोप
एनडीए सरकार वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित करने की तैयारी में है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार वक्फ बोर्ड की असीमित शक्तियों को सीमित करने के लिए वक्फ अधिनियम में संशोधन करने की योजना बना रही है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस द्वारा किए गए संशोधनों के बाद वक्फ बोर्ड भू-माफिया की तरह काम कर रहा है, जिसमें व्यक्तिगत भूमि, सरकारी भूमि, मंदिर की भूमि, और गुरुद्वारों सहित विभिन्न प्रकार की संपत्तियों पर कब्जा किया जा रहा है।
वक्फ एक्ट 2013 के दुरुपयोग और इसके परिणामस्वरूप विभिन्न संपत्तियों पर हुए दावों ने भारतीय समाज में विवाद और असहमति को जन्म दिया है। इन दावों की वैधता और वक्फ बोर्ड के कार्यों में पारदर्शिता को लेकर व्यापक चर्चा और समीक्षा की आवश्यकता है। सरकार की योजना वक्फ अधिनियम में संशोधन करके वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित करने की है, जिससे संपत्तियों पर कब्जा करने के मामलों में कमी आएगी।
वक़्फ़ बोर्ड मामले को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी को भेजे जाने के बाद.... संसद की जॉइंट पार्लियामेंट कमिटी ने इसपर जनता से राय माँगी है...!
इसीलिए, यही सही समय है पार्लियामेंट्री कमिटी तक अपनी राय पहुंचाने का..
अतः , सोशल मीडिया से हटकर सरकार तक अपनी विचारधारा को पहुचाएं...
आपको करना केवल इतना है कि इस नीचे लिखी ईमेल को कॉपी करें...
और, अपनी ईमेल इस email id पर भेज दें—
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वक्फ बोर्ड को कांग्रेस सरकार द्वारा असीमित अधिकार
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस द्वारा वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधनों के बाद वक्फ बोर्ड पर भू-माफिया की तरह काम करने और विभिन्न प्रकार की संपत्तियों को जब्त करने का आरोप लगाया गया है। शुरुआत में वक्फ की पूरे भारत में करीब 52,000 संपत्तियां थीं, जो 2009 तक 3,00,000 पंजीकृत संपत्तियों तक पहुंच गई थीं। आज, पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की संख्या 8,72,292 से अधिक हो गई है, जो 8,00,000 एकड़ से अधिक भूमि पर फैली हुई है।
वक्फ अधिनियम, 1923 अंग्रेजों द्वारा पेश किया गया था, जिसे बाद में संशोधित किया गया और 1954 में संसद द्वारा पारित किया गया था। 1995 में एक नया वक्फ अधिनियम पारित किया गया, जिसने वक्फ बोर्डों को असीमित शक्तियां प्रदान कीं। 2013 में, इस अधिनियम में और संशोधन करके वक्फ बोर्ड को किसी की संपत्ति छीनने की असीमित शक्तियां दे दी गई, जिसे किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी।

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