बताएं कांग्रेस,समाजवादी पार्टी और दक्षिण की पार्टियां वो भागवत जी की धर्मांतरण नही होना चाहिए के बयान से सहमत है
संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत बिहार में दिया बयान बड़ा वायरल हो रहा है कि भागवत ने कहा- जो मर्यादा का पालन करते हुए कार्य करता है, गर्व करता है, किन्तु लिप्त नहीं होता, अहंकार नहीं करता, वही सही अर्थों मे सेवक कहलाने का अधिकारी है।
इस बयान के साथ मणिपुर की अशांति को तो खेतिहर खलिहर पत्रकार एवम पांच से नौ बजे तक लिपस्टिक पावडर लगाकर बैठने वाले अनपढ़ एंकर संपादक भी उनके बयान के एक अंश को ही हाईलाइट करके अपनी दुकान चला रहे है डॉ भागवत ने इसके अलावा भी बहुत कुछ कहा उन्होंने कहा कि
पैगंबर साहब का इस्लाम क्या है, ये सोचना पड़ेगा। ईसा मसीह की ईसाइयत क्या है, सोचना पड़ेगा। भगवान ने सबको बनाया है। भगवान की बनाई जो कायनात है, उसके प्रति अपनी भावना क्या होनी चाहिए, सोचना पड़ेगा।
बाहर के विचार हमारे यहां रह गए, इससे फर्क नहीं पड़ता
समाज में एकता चाहिए, लेकिन अन्याय होता रहा है, इसलिए आपस में दूरी है। मन में अविश्वास है, हजारों वर्षों का काम होने के कारण चिढ़ भी है। अपने देश में बाहर से आक्रांता आए, आते समय अपना तत्वज्ञान भी लेकर आए। यहां के कुछ लोग विभिन्न कारणों से उनके विचारों के अनुयायी बन गए, ठीक है।
अब वे लोग चले गए, उनके विचार रह गए। उनको मानने वाले रह गए। विचार वहां के (बाहर के) हैं तो यहां की परंपरा को उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। बाहर के विचारों में जो हम ही सही, बाकी सब गलत है, उसको छोड़ो। मतांतरण वगैरह करने की जरूरत नहीं है। सब मत (धर्म) सही हैं, सब समान हैं तो फिर अपने मत पर ही रहना ठीक है। दूसरों के मत का भी उतना ही सम्मान करो।
बाहर से आई विचारधारा में सिर्फ वे ही सही, बाकी गलत
हजारों वर्षों से जो पाप हमने किया, उसको साफ करना पड़ेगा। ऐसे ही आपस में मिलना-जुलना है। भारतोद्भव जो लोग हैं, उनसे मिलना आसान है, क्योंकि एक ही बुनियाद है। वही यम नियमात्मक आचरण का पुरस्कार सर्वत्र है। और एक से सब निकला है। एकम सत् विप्रा बहुधा वदंति...।
साभार दैनिक भास्कर
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