|
| माफिया ब्रदर्स की लिखी चिट्ठी का लिफाफा दिखाकर ब्लैकमेल करने की मीडिया साजिश! |
माफिया ब्रदर्स अतीक अशरफ हत्याकांड ने जहां प्रयागराज को सुकून दिया है तो उत्तर प्रदेश बल्कि देश की राजनीति को गरमा दिया है। दोनों की हत्या को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है तो सरकार ने मामले की जांच लिए जांच टीम गठित कर दी है।
इस बीच लश्करे मीडिया एक ऐसी गुप्त चिट्ठी की चर्चा कर रहा है कि जल्द ही अशरफ की चिट्ठी मुख्य न्यायधीश और मुख्यमंत्री योगी के पास पहुंच सकती है, इसमें उसका नाम है जिसने अशरफ और अतीक पर हमला करवाया।
प्रिंट की क्राइम रिपोर्टिंग करने वाले हार्ड कोर पत्रकार अच्छे से इस प्रकार की चिट्ठी का मतलब जानते है कि हर अपराधी इस तरह दबाव बनाने की कोशिश करता है जिससे उसकी जान बची रहे।
लश्करे मीडिया द्वारा चिट्ठी लिफाफा दिखाकर ब्लैकमेलिंग करने की साजिश
कई टी वी चैनल एक लिफाफा दिखा कर चीख रहे कि हमारे पास वो चिट्ठी आ गई है जिसमे वो नाम लिखे जिन्हे माफिया ब्रदर्स की हत्या के लिए जिम्मेदार बताया गया है ।
अतीक की पेशाब की धार तक दिखाने वाली मीडिया क्यों नही चिट्ठी में लिखे नाम बता रही क्यों नही चिट्ठी का मजमून दिखा रही है इसका मतलब साफ है ये चिट्ठी में लिखे संभावित नाम वालों को ब्लैक मेल कर मोटा धन ऐठने का खेल कर रही है
कोर्ट में क्या हैसियत है इसी चिट्ठी की
टी वी मीडिया के खैराती पत्रकार ऐसे चीख रहे है जैसे यह चिट्ठी किसी अपराधी द्वारा नही बल्कि एक शरीफ शहरी द्वारा अपने पर हुए जुल्मों की दास्तान का बयान है।
अगर इस चिट्ठी में दुर्दांत अपराधी अशरफ द्वारा प्रधानमंत्री, आर्मी चीफ का भी नाम लिख दिया गया हो तो कोर्ट इसे मान लेगा, निश्चय ही इसमें मुख्यमंत्री योगी जी का नाम तो होगा नही
अतीक के वकील विजय मिश्रा ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के पास एक सीलबंद चिट्ठी पहुंचेगी। इसमें अतीक और अशरफ को मरवाने वाले का नाम लिखा होगा। अशरफ मुझसे बोला था अगर उसकी हत्या हो जाती है तो यह बंद लिफाफा चीफ जस्टिस और सीएम योगी आदित्यनाथ पास पहुंच जाएगा।
प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की मौत के बाद टी वी चैनल व सोशल मीडिया पर अशरफ का वो बयान तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें उसने ये दावा किया था कि एक अफसर ने उसे धमकी दी है कि 15 दिन में उसे जेल से बाहर निकाला जाएगा और मार दिया जाएगा. अशरफ ने ये बयान 28 मार्च को नैनी जेल से बरेली जेल जाते वक्त मीडिया के कैमरों के सामने दिया था और ये बयान एकदम सच साबित हुआ. अतीक और अशरफ जेल से बाहर आए, और 17 दिन के भीतर उनकी हत्या हो गई.
ये बयान उस समय है जब अशरफ को उमेश पाल अपहरण केस में अतीक अहमद को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी जबकि उसको दोषमुक्त कर दिया था. अशरफ को जब बरेली ले जाया जा रहा था. हालांकि इस दौरान अशरफ ने इस बात खुलासा नहीं किया था कि किस अफसर ने उसे ये धमकी दी थी. उसने कहा था कि अगर उसकी हत्या हुई तो उसने एक चिट्ठी लिखी है जो सीधा सुप्रीम कोर्ट के जज के पास पहुंच जाएगी, जिसमें उसका नाम लिखा है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें