यूपी में कानून-व्यवस्था और क्राइम कंट्रोल एक बड़ा मुद्दा रहा है। 2017 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो क्राइम कंट्रोल के लिए एनकाउंटर की एक अघोषित पॉलिसी पर पुलिस ने अमल करना शुरू कर दिया। ‘फुल एनकाउंटर’ के साथ ही मुठभेड़ में अपराधी के पैर में गोली लगने को ‘ऑपरेशन लंगडा "कहा गया।
पांच वर्ष में 431 एनकाउंटर करके मुलायम सिंह की सरकार "एनकाउंटर किंग",योगी सरकार बहुत पीछे
आंकड़े देंखे तो मुलायम सिंह यादव और मायावती की सरकार में योगी आदित्यनाथ की तुलना में ज्यादा अपराधी एनकाउंटर में मारे गए थे। वर्ष 2003 से 2007 के बीच एनकाउंटर में मारे जाने वाले अपराधियों का रिकॉर्ड बना। इस दौरान 431 अपराधी मारे गए थे। वहीं मायावती की सरकार में 2008 से 2012 के बीच एनकाउंटर्स में 261 अपराधी मारे गए, जबकि योगी सरकार में 6 साल में 178 अपराधी एनकाउंटर में मारे गए हैं।
अखिलेश शासन में नाममात्र के एनकाउंटर,आतकवादियों पर से मुकदमे वापिस लेने का षड्यंत्र
अखिलेश यादव के शासनकाल 2012 से 2017 तक कुल 28 अपराधी मारे गए लेकिन इसी शासन काल में चौबीस हजार सात सौ चौरासी( 24784) कत्ल, सौलह हजार तीन सौ इक्कीस (16321) बलात्कार तथा साठ हजार(60,000) अपहरण के मामले दर्ज हुए ये आंकड़े अखिलेश सरकार के जंगल राज को बयां करते है
अखिलेश शासन में महिला सुरक्षा के दावे निकले 'झूठ', आंकड़े बया कर रहे सच्चाई
पांच सालों तक यूपी में महिला सुरक्षा और सम्मान की क्या स्थिति रही, इसका अंदाजा सामने आए आंकड़ों से लगा लीजिए। आंकड़ों के अनुसार, साल 2014 में प्रदेश भर में करीब 3,467 रेप की घटनाएं हुईं। वहीं, अगले ही साल 2015 रेप की वारदात में 161% की बढ़ोत्तरी हुई और 9075 रेप के मामले दर्ज हुए।बुलंदशहर हाइवे गैंगरेप और लखनऊ आशियाना रेप केस जैसे न जाने कितने मामले थे, जो अखिलेश सरकार की नाक के नीचे हुए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि वर्ष 2017 से 2022 के दौरान योगी सरकार में 9185 एनकाउंटर हुए, जबकि अखिलेश सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में कुल 4359 एनकाउंटर हुए थे। वहीं योगी सरकार में जहां 156 अपराधी एनकाउंटर में मारे गए, जबकि अखिलेश सरकार में 40 अपराधी एनकाउंटर में मारे गए थे। इसके अलावा अलावा योगी सरकार में 19908 अपराधी एनकाउंटर में गिरफ्तार किए गए, जबकि अखिलेश सरकार में 11963 अपराधी गिरफ्तार किए गए थे।
ऑपरेशन लंगड़ा
योगी सरकार के दौरान एनकाउंटर में घायल होने वाले अपराधियों की संख्या 3664 थी, जबकि अखिलेश सरकार में 282 अपराधी एनकाउंटर में जख्मी हुए थे। योगी सरकार में इन्हीं घायल अपराधियों के लिए ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ शब्द का इस्तेमाल हुआ।
2003 से 19 मार्च 2017 के बीच यूपी में 800 अपराधी एनकाउंटर में मारे गए
योगी सरकार के दौरान यह साबित करने की कोशिश होती रही है कि अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए सख्ती से कार्यवाही की जा रही है, जिसका अहम हिस्सा ये एनकाउंटर हैं। अगर आंकड़ों पर अगर गौर करें तो वर्ष 2003 से 19 मार्च 2017 के बीच यूपी में 800 अपराधी एनकाउंटर में मारे गए थे, यानी हर साल औसतन 56 अपराधियों की मुठभेड़ में मौत हुई, जबकि योगी सरकार में यह औसत निकालें तो हर साल 30 अपराधी एनकाउंटर में मारे गए हैं।
मुलायम सिंह के पांच वर्षों के शासनकाल में रिकॉर्ड 499 अपराधी मारे गए
यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि। मुलायम सिंह यादव की सरकार में योगी आदित्यनाथ की तुलना में ज्यादा अपराधी एनकाउंटर में मारे गए थे। वर्ष 2003 से 2007 के बीच एनकाउंटर में मारे जाने वाले अपराधियों का रिकॉर्ड बना। इस दौरान 499 अपराधी मारे गए थे। खास यह भी कि मुलायम सरकार में 11 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे, वहीं मायावती की सरकार में 2008 से 2012 के बीच एनकाउंटर्स में 261 अपराधी मारे गए और 8 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।

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