शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वाला हर व्यक्ति जानता है कि इस बाजार में लाभ केवल लंबी अवधि तक शेयर को रखने से ही होता है क्योंकि आज डूबने वाला शेयर कल बाउंस बैक अवश्य करता है ।पिछले वर्ष 2022 मे दो बार ये बाजार बीस लाख करोड़ का गौता लगाकर आया है ।
हिंडनबर्ग कैसे बर्बाद करके कमाई करती है
पहले भी कई कंपनियों को बर्बाद कर चुकी है ये कंपनी ,जिनके शेयर 99 फीसदी तक डूब गए थे हिंडनबर्ग ने Polarity TE, Predictive Technology, Eros International और HUMBL जैसी कंपनियों के खिलाफ भी रिपोर्ट जारी थी. उनके शेयर 99-99.9 फीसदी तक क्रैश हो चुके हैं.
कैसे करती है हिंडनबर्ग की कमाई?
हिंडनबर्ग एक शॉर्ट सेलिंग कंपनी है. यह पहले पता लगाती है कि किन कंपनियों में क्या गड़बड़िया है. फिर उनके शेयर गिराकर मुनाफा कमाया जा सके, इसलिए यह सिर्फ लिस्टेड कंपनियों को ही अपना निशाना बनाती है. किसी भी कंपनी के बारे में बड़े-बड़े खुलासे करने से पहले ये कंपनी उसके शेयरों में शॉर्ट पोजीशन ले लेती है और फिर खुलासा कर देती है. इससे कंपनी के शेयर तेजी से गिरने लगते हैं, जिससे हिंजनबर्ग मुनाफा बनाता है.
समझिए क्या होती है शॉर्ट सेलिंग
जो लोग शॉर्ट सेलिंग के बारे में नहीं जानते हैं, वह यही सोचते हैं कि आखिर बिना खरीदे ही कोई शेयर कैसे बेचा जा सकता है? दरअसल, शेयर बाजार में ट्रेडिंग में ये खास सुविधा मिलती है. यहां आप पहले शेयर को बेच सकते हैं और बाद में उन्हें खरीद सकते हैं. ऐसा इसलिए मुमकिन है क्योंकि जिस ब्रोकर के पास आपका अकाउंट होता है, उसके पास बहुत सारे शेयर होते हैं. ऐसे में अगर आप चाहे तो किसी भी शेयर को पहले खरीदने के बजाय पहले बेच सकते हैं यानी सेल कॉल (Sell Call) दे सकते हैं.
क्या है हिंडनबर्ग रिसर्च?
हिंडनबर्ग रिसर्च एक अमेरिकी निवेश कंपनी है, जिसे Nathan Anderson नाम के एक बिजनेसमैन ने शुरू किया था. इसकी स्थापना 2017 में की गई थी. कंपनी दावा करती है कि वह फॉरेंसिक फाइनेंशियल रिसर्च में एक्सपर्ट है और इसके पास दशकों का अनुभव है. कंपनी की वेबसाइट के अनुसार यह कंपनी असामान्य सूत्रों से मिली जानकारियों के आधार पर शोध करती है, जिसे ढूंढना बेहद मुश्किल होता है. इस कंपनी की शुरुआत करने से पहले वह Harry Markopolos के साथ भी काम चुके हैं, जिन्होंने Bernie Madoff की पोंजी स्कीम का पर्दाफाश किया था. हिंडनबर्ग रिसर्च नाम क्यों? इस कंपनी के नाम के पीछे भी एक खास वजह है. इसका नाम हिंडनबर्ग रिसर्च एक खास मकसद से रखा गया था. कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार यह एक डिजास्टर यानी त्रासदी पर आधारित है. कंपनी का मानना है कि उस डिजास्टर को टाला जा सकता है. 6 मई 1937 को लगभग 100 लोगों को लेकर जा रहा हिंडनबर्ग एयरलाइंस का विमान अमेरिका से न्यू जर्सी के मैनचेस्टर में हादसे का शिकार हुआ था. इसमें करीब 37 लोगों की मौत हुई थी. इसके तहत हाइड्रोजन से भरे एयरशिप में करीब 100 लोगों को बैठाया गया था, जो बहुत ही ज्वनलशील गैस है. यह भी तब किया गया, जबकि इसी तरह के दर्जनों छोटे-मोटे हादसे पहले भी हो चुके थे.
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