जोखिम के आधार पर संक्रमितों को तीन श्रेणियों में बांटकर इनका अलग-अलग 12 अस्पतालों में उपचार होगा। इसी के चलते जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बुधवार को सर्किट हाउस में स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की।
🔺जिलाधिकारी ने बताया कि जिन संक्रमितों की उम्र 60 साल से कम और उनमें कोई लक्षण नहीं उन्हें एल-वन श्रेणी अस्पतालों में भर्ती किया जाएगा। जिन संक्रमितों की उम्र 60 साल से अधिक है और उनमें लक्षण हैं उन्हें एल-टू श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे संक्रमित जिनमें मल्टी ऑर्गन फेल्योर है। स्थिति गंभीर है उनका उपचार एल-थ्री श्रेणी में होगा।
🔹एसएन में एल-टू के साथ एल-थ्री सुविधा
उन्होंने बताया एसएन मेडिकल कॉलेज में 100 बेड का एल-टू आइसोलेशन वार्ड है। दूसरा 100 बेड का आइसालेशन वार्ड एल-थ्री के लिए तैयार हो रहा है। एसएन में 23 वेंटिलेटर हैं। फिलहाल 10 वेंटिलेटर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यहां गुर्दा, हृदय व अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त संक्रमितों का उपचार होगा।
🔹एल-वन में 2500 बेड का लक्ष्य
आगरा में एल-वन श्रेणी के संक्रमितों के लिए 2500 बेड का लक्ष्य है। अभी 1700 बेड हैं। कीठम स्थित एचएमआईटी, शमसाबाद रोड स्थित माउंट लिट्रा स्कूल व ग्लोबल कॉन्वेट स्कूल और अरतौनी में आगरा पब्लिक स्कूल में एल-वन श्रेणी के अस्पताल बनाए हैं। चार और अस्पतालों का निरीक्षण हो चुका है। इसके बाद इनकी संख्या आठ हो जाएगी।
🔹एल-टू में 420 बेड से होंगे एक हजार
🔹60 साल से अधिक उम्र के संक्रमितों की तादाद बढ़ रही है। खतरा भी इनके लिए ज्यादा है। एसएन, जिला अस्पताल, नयति और मूलचंद में ऐसे मरीजों के लिए एल-टू श्रेणी की सुविधा है। चारों अस्पतालों में 420 बेड हैं, जिन्हें बढ़ाकर 1000 तक किया जा रहा है।

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