पैसे से जेल में भी खरीद सकते हैं 'आजादी'!
तिहाड़ जेल के प्रभावशाली कैदियों के लिए विशेषाधिकार की कहानियां पहली बार तब सामने आईं थीं जब 1978 में मारुति उद्योग विवाद को लेकर श्रीमती इंदिरा गाँधी के पुत्र नेता संजय गांधी को 30 दिन जेल की सजा सुनाई गई थी. तब उनपर जेल से ही सरकार चलाने के आरोप लगे थे. उन्हें घर जैसी तमाम सुविधाएं दी गयी थी. इसके अलावे हाल के वर्षों में राष्ट्रमंडल खेल घोटाले में जेल गए सुरेश कलमाड़ी, 2जी घोटाले में जेल गए ए राजा, शाहिद बलवा और विनोद गोयनका, पप्पू यादव, क्रिकेटर एस श्रीसंत समेत तमाम वीआईपी कैदियों ने वीआईपी सुख-सुविधाओं का आनंद लिया था. जिसमें टीवी, अखबार, मिनरल वाटर से लेकर फाइव स्टार होटलों से मंगाया गया खाना तक दिया जाता था. इसमें कई सुविधाएं जेल अधिकारियों को पैसे देकर अवैध रुप से भी हासिल की गई |तिहाड़ से जुड़े सूत्र बताते है कि हथेलियों में पैसे रखकर जेल में आज़ादी खरीदी जा सकती है. कैदियों को आसानी से शराब, सिगरेट, घर में पका हुआ भोजन, मोबाइल फोन, एयर कंडीशनिंग, टीवी समेत तमाम विलासिता वाली चीजें हासिल की जा सकती है. इसी तरह 2002 में वरिष्ठ पत्रकार इफ्तिखार ने 'जेल में कटे वो दिन' किताब लिखी थी. जिसमें उन्होंने लिखा था कि जेल के अंदर रिश्वत सबसे सुरक्षित शर्त है. पैसा आपको घरेलू मदद लेने, घर का खाना खाने में मदद कर सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि अधिकारियों द्वारा आपके साथ अच्छा व्यवहार हो. यह अंदर की एक अलग दुनिया है.

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