फ्रक्टोज़ एवम ग्लूकोस की मात्रा निर्भर करती है कि मधुमक्खियों द्वारा मकरंद किस स्रोत से इकठ्ठा किया गया है।अगर फ्रुक्टोज की मात्रा ज्यादा तो शहद का क्रिस्टलीकरण कम और ग्लूकोज ज्यादा तो क्रिस्टलीकरण ज्यादा होगा।
कारण - फ्रुक्टोज का ज्यादा घुलनशील होना और ग्लूकोज का कम।
'अकेशिया' जाति के वृक्षों के फूलों से लिए गए मकरंद में फ्रुक्टोज की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए उसमें क्रिस्टलीकरण कम होता है
क्रिस्टलीकरण होता कब है?
कमरे के तापक्रम अर्थात सामान्य तापक्रम अर्थात 37 डिग्री सेंटीग्रेड पर शहद सामान्यतः तरल अवस्था में मिलेगा। मगर तापमान कम होने पर क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया होगी और ग्लूकोज का अणु पानी के अणु का साथ छोड़ देगा और क्रिस्टल फॉर्म में आ जायेगा।
क्रिस्टल कितना बड़ा होगा?
यह निर्भर करेगा क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया के होने में लगने वाले समय पर। प्रक्रिया तेज़ी से होगी तो क्रिस्टल छोटा बनेगा और धीरे धीरे होगी तो बड़ा क्रिस्टल बनेगा। मगर बनेगा जरूर।
इसलिए यह कहना कि अगर शहद में क्रिस्टल बन गए तो वह शुद्ध नहीं है, गलत है। बल्कि इसका उल्टा कुछ हद तक सत्य है।
शहद ना जमने के दो ही कारण हैं।
1. या तो उसमें फ्रुक्टोज ज्यादा मात्रा में है या फिर
2. उसमें मिलावट की गई है और मिलावट करके उसे पतला कर दिया गया है।
क्रिस्टलीकरण होने से शहद की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसलिए अगली बार शहद जमे तो परेशान मत होना। खा लेना उसे फेंकना मत।
और हाँ तापमान 10 डिग्री से कम होने पर भी क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया धीमी होगी और शहद देर से जमेगा। सबसे अधिक तेजी से होगी 10-27 डिग्री के तापमान पर। सर्दियाँ आने वाली हैं इसलिए शहद बोतल से निकाल कर चौड़े मुँह के डब्बे में रख लेना।
सीधी ऊँगली से निकल जायेगा। वर्ना.... बोतल ही फोड़नी पड़ेगी।


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