आजकल नेताओं में चाहे पक्ष के हों या विपक्ष के किसी भी महत्वपूर्ण अभियान या कार्यक्रम के प्रति सिर्फ फ़ोटो खिचाऊ संस्कृति शेष रह गयी है ।
वृक्षारोपण हो ,सफाई आदि का कोई अभियान हो या फिर किसी सामाजिक अपराध या बिजली-पानी-कानून व्यवस्था के लिए विरोध प्रदर्शन ही क्यों न हो सिर्फ दांत निपोर के मीडिया के सामने फ़ोटो खीचाने की होड़ तक सीमित रह गयी है ।
अगर कल इन नेताओं को दिल्ली में ही रह कर सफाई का संदेश देना था तो पुरानी दिल्ली की संकरी सड़कों और गलियों में दो चार घंटे झाड़ू लगाते , दिल्ली नगर निगम के सफाई कर्मियों के साथ कूड़ा निस्तारण में 4-5 घंटे पसीना बहाते, राजधानी में ही सीवर बनने की कगार पर पहुंच चुकी यमुना के तटों की ही 2-3 किलोमीटर सफाई कर आम जनता को प्रेरित करते ।
छुटभैइये नेता ऐसी फ़ोटो खिचाऊ होड़ मचाते तब भी गनीमत होती किन्तु रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, सेलेब्रेटी सांसद हेमामालिनी, हंसराज हंस, कई बार के सांसद रमेश विधूड़ी, राजीव प्रताप रूडी जैसे वरिष्ठ नेता अगर ऐसी ड्रामेबाजी करें तो मन में ये सवाल उठता है कि आखिर ये क्या संदेश देना चाहते हैं नई पीढ़ी को !!?
माननीय नेता गणों अगर ऐसा ही भौंडा नाटक करना हो तो आप से हाथ जोड़ कर निवेदन है कि बस करिए ।
अगर कुछ करना ही है तो फिर सबक लीजिये और सीखिए उस बूढ़े 'अन्ना' से जिसने लोकपाल आंदोलन में अपने जान की बाजी लगा कर देश भर की जनता में अलख जगा दिया था और खुद कोई राजनैतिक लाभ नही उठाया । ये अलग बात है कि तब बंदर के हाथ उस्तरा लग गया था पर जनता के दबाव में कम से कम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी ऑनलाइन ऐसी व्यवस्थाओं का निर्माण प्रारम्भ हुआ जिससे भ्रष्टाचार पर कुछ तो नकेल लगी ।
मनोज मिश्रा


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