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बुधवार, 29 मई 2019

कांग्रेस को बचाने के लिए किसके कदम पर चलेंगे राहुल, इंदिरा या सोनिया?


नई दिल्ली : कांग्रेस पार्टी द्वारा लगातार दूसरे लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देखने के बाद पार्टी नेतृत्व में काफी हलचल है। 25 मई को हुई सीडब्ल्यूसी की मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस्तीफे की पेशकश की, जिसे कमिटी के अन्य नेताओं ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया। खबरों की मानें तो राहुल गांधी चाहते हैं कि गांधी पारिवार से बाहर के किसी व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया जाए। ऐसे में पार्टी राहुल को अध्यक्ष बनाए रखने के लिए कई तरह के विकल्पों पर विचार कर रही है। फिलहाल नेहरू-गांधी परिवार का पार्टी के नेतृत्व में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व है। राहुल गांधी अध्यक्ष, सोनिया गांधी कांग्रेस पार्लियामेंटरी पार्टी चीफ और प्रियंका गांधी ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी की महासचिव हैं।

एक कार्यकारी अध्यक्ष? 
भारत की सबसे पुरानी पार्टी ने पहले भी कई बार इस तरह के संकट झेले हैं। ऐसे में पार्टी के पास इन समस्याओं से निपटने के लिए कई समाधान हैं। उनमें से एक है कि एक कार्यकारी अध्यक्ष का पद बनाया जाए, जो पार्टी अध्यक्ष की मदद करेगा और रोजमर्रा के काम का भार अध्यक्ष पर नहीं पड़ेगा। इससे पार्टी अध्यक्ष संगठनात्मक काम पर ज्यादा फोकस कर पाएंगे। राहुल गांधी के इस्तीफे के मुकाबले ऐसा करने से पार्टी में अच्छा संदेश जाएगा। 1983 में दक्षिण भारत में कांग्रेस की करारी हार के बाद इंदिरा गांधी ने भी कमलापति त्रिपाठी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था, ताकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को हार से बचाया जा सके। राहुल गांधी ने खुद भी कई पीसीसी (प्रदेश कांग्रेस कमिटी) में कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए हैं, ताकि नेतृत्व को मजबूत किया जा सके। 

एक मंडली? 
कुछ रिपोर्ट में ऐसी भी खबरें हैं कि पार्टी रोजमर्रा के काम करने के लिए प्रजीडियम पर भी विचार कर रही है, जिसमें युवा और बुजुर्ग का मिलन भी होगा। हालांकि इसके लिए पार्टी के संविधान में संशोधन की जरूरत होगी, जिसके बाद पार्टी अध्यक्ष के पास ये बदलाव करने की ताकत होगी। यदि कांग्रेस राहुल का विकल्प नहीं ढूंढ पाती है, तो पार्टी के पास यह अंतिम विकल्प होगा। 

तब सोनिया हुईं थीं नाराज 
यदि पार्टी उन्हें बने रहने पर मना लेती है, तो यह खुद में बड़ी बात होगी। 1999 में जब सोनिया गांधी की अध्यक्षता को शरद पवार ने चुनौती दी थी, तो सोनिया ने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने का फैसला कर लिया था। इसके बाद कांग्रेस वर्किंग कमिटी और पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें मनाने की कई बार कोशिश की। इसके बाद सोनिया गांधी अध्यक्ष बने रहने पर राजी हुई थी। इसके बाद वह पार्टी में सबसे ज्यादा समय तक अध्यक्ष रहीं। उन्होंने 2017 तक यह पद संभाला। 2014 की हार के बाद कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने सोनिया को पार्टी में पर्याप्त परिवर्तन की इजाजत दी थी। अब पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी भी ऐसा कदम उठा सकते हैं। 

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