गरीबों की जमीन विवाद: कोर्ट में पेश न होने पर मून गोयल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
आगरा। गरीबों की जमीन से जुड़े चर्चित कथित घोटाले में घिरे बिल्डर मून गोयल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। न्यायालय से राहत न मिलने और अग्रिम जमानत खारिज होने के बावजूद अदालत में पेश न होने पर अब उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने उनके खिलाफ एक बार फिर गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करने की मांग की है।मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में दाखिल प्रार्थना पत्र में परिषद ने आरोप लगाया है कि मून गोयल लगातार न्यायिक प्रक्रिया से बचने की कोशिश कर रहे हैं। परिषद के अधिवक्ता कुलदीप दीक्षित ने अदालत को बताया कि आरोपी मून गोयल को उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली थी और जिला जज द्वारा उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई थी। इसके बावजूद वह निर्धारित समय सीमा के भीतर अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ।
पहले भी जारी हुआ था एनबीडब्ल्यू, फिर भी नहीं हुए पेश
अधिवक्ता के अनुसार, जिला न्यायाधीश द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद आरोपी को 6 जून तक संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण करना था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इतना ही नहीं, इससे पहले जारी गैर-जमानती वारंट की तामील होने के बाद भी आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।
यही कारण है कि परिषद ने अदालत से मांग की है कि न्यायिक आदेशों की लगातार अनदेखी को देखते हुए आरोपी के खिलाफ दोबारा गैर-जमानती वारंट जारी किया जाए और उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित कराई जाए।
गरीबों की जमीन का मामला बना बड़ी कानूनी चुनौती
मामला गरीबों की जमीन में कथित अनियमितताओं और हेराफेरी से जुड़ा बताया जा रहा है। इस प्रकरण में बिल्डर मून गोयल पहले से जांच और न्यायिक कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अदालत के समक्ष पेश होने के निर्देशों का भी पालन नहीं किया जा रहा है, तो न्यायालय अगला कदम क्या उठाएगा?
अदालत के फैसले पर टिकी निगाहें
सीजेएम कोर्ट में दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद अब सभी की निगाहें न्यायालय के अगले आदेश पर टिकी हैं। कानूनी हलकों में चर्चा है कि यदि अदालत परिषद की मांग स्वीकार करती है, तो मून गोयल के खिलाफ कार्रवाई का दायरा और सख्त हो सकता है।

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