आगरा में 'भगवा' किले में दरार: 9 में से 8 विधायक फेल, क्या ताजनगरी में पलटेगी सत्ता की बाजी?
आगरा: ताजनगरी की सियासत से एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। कहने को तो आगरा की सभी 9 सीटों पर भाजपा का परचम है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जनता का 'इंतकाम' आंकड़ों में तब्दील हो चुका है
9 में से 8 विधायक फेल साबित हुए हैं। यह सिर्फ नाराजगी नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव के लिए भाजपा को 'सीधा अल्टीमेटम' है।
जनाक्रोश का ज्वालामुखी: सबसे बुरा हाल फतेहाबाद का है, जहाँ 'दलबदलू' की छवि छोटेलाल वर्मा पर भारी पड़ रही है। यहाँ 90% जनता उन्हें फिर से देखना तक नहीं चाहती।
एत्मादपुर से धुरंधर विधायक : इस सियासी अंधेरे में केवल एत्मादपुर के डॉ. धर्मपाल सिंह अपनी साख बचाने में कामयाब रहे हैं। वे इकलौते विधायक हैं जिन्हें जनता ने 51% के साथ 'पासिंग मार्क्स' दिए हैं।
दिग्गज भी ढह गए: कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य और योगेंद्र उपाध्याय जैसे 'भारी-भरकम' नाम भी जनता की कसौटी पर आधे अधूरे ही नजर आ रहे हैं।: डॉ. जीएस धर्मेश (84%) और भगवान सिंह कुशवाह (81%) के खिलाफ गुस्सा सातवें आसमान पर है।
दलबदल करके भाजपा में आए छोटेलाल वर्मा के खिलाफ जनता का गुस्सा चरम पर है—90% लोग उन्हें दोबारा टिकट देने के खिलाफ हैं।
उनके बाद डॉ. जीएस धर्मेश (84%) और खेरागढ़ के भगवान सिंह कुशवाह (81%) भी जनता की नाराजगी की लिस्ट में ऊपर हैं।
बाकी विधायकों का हाल भी खराब
चौधरी बाबूलाल – 72% असंतोष
योगेंद्र उपाध्याय – 63% असंतोष
पक्षालिका सिंह – 63% असंतोष
बेबीरानी मौर्य – 59% असंतोष
पुरुषोत्तम खंडेलवाल – 54% असंतोष
सत्ता को चेतावनी: यह आंकड़े भाजपा के लिए 'वेक-अप कॉल' हैं। अगर नेतृत्व ने समय रहते इन 8 चेहरों पर कैंची नहीं चलाई, तो आगरा का यह असंतोष पूरी प्रदेश की राजनीति में आग लगा सकता है।भाजपा के लिए यह खतरे का सायरन है। आगरा ने साफ कह दिया है—चेहरे चमकाने से काम नहीं चलेगा, अब काम चाहिए वरना विदाई तय है।

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