डूबते तानाशाह का आतंक –पूर्व ISI चीफ व उनकी बेटी रहस्यमय ढंग से लापता, निशाने पर पाक सेना!
पाकिस्तान के सत्ता के गलियारों में एक ऐसा तूफान खड़ा हो गया है जो न केवल उसके सैन्य संस्थानों को कंपा रहा है, बल्कि पूरे पाकिस्तान की राजनीति को भी भीतर से खोखला कर रहा है।
पाकिस्तान से आ रही पुष्ट खबरों के अनुसार, पूर्व आईएसआई प्रमुख (DG ISI), लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) "नदीम अंजुम" और उनकी बेटी "लारायब अंजुम" को पाकिस्तानी सेना ने उठा लिया है। यह कदम सेना प्रमुख "जनरल आसिम मुनीर" के सीधे आदेश पर उठाया गया है।
यह एक ऐतिहासिक घटना है, क्योंकि पहली बार पाकिस्तान के इतिहास में एक पूर्व ISI प्रमुख को इस तरह "गायब" किया गया है।
लेकिन सवाल यह है: क्यों? क्यों एक सेवानिवृत्त अधिकारी को, जो अब सत्ता से दूर है, अचानक हिरासत में लिया गया? क्यों सेना ने नदीम अंजुम की बेटी को भी उठा लिया? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल - यह गिरफ्तारी आखिर किसके लिए खतरनाक साबित हो सकती है?
नदीम अंजुम कौन हैं और क्यों हैं वे खतरनाक?
नदीम अंजुम पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के 30वें महानिदेशक थे। 2021 में उन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन यह नियुक्ति पूरी तरह विवादास्पद थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने चाहते थे कि जनरल फैज हमीद को ISI का प्रमुख बनाया जाए, और आदेश भी जारी कर दिये।
लेकिन उस समय के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने पीएमओ के आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल नदीम अंजुम को नियुक्त कर दिया।
क्यों? क्योंकि नदीम अंजुम बाजवा के बेहद करीबी और वफादार अधिकारी थे।यहीं से शुरू होता है इस कहानी का असली पेंच।
जनरल बाजवा 2016 से 2022 तक पाकिस्तान के सेना प्रमुख रहे और वे एक "संतुलन वादी" नीति में विश्वास रखते थे। लेकिन जनरल आसिम मुनीर, जो अब सेना प्रमुख है, एक बिल्कुल अलग किस्म का सेनाध्यक्ष है।
मुनीर Hard State में विश्वास रखता है, जहाँ सेना ही सब कुछ है और राजनेता केवल "पिंजरे के तोते" हैं। इसीलिए मुनीर ने बाजवा के सभी समर्थकों को चुन-चुन कर निकालना शुरू कर दिया है।
बाजवा की "पुरानी दुनिया" और मुनीर की "नई दुनिया"
2022 में जनरल बाजवा की सेवानिवृत्ति के बाद, जनरल मुनीर धीरे-धीरे सेना को अपने हिसाब से ढालने लगा। पहली कार्रवाई अगस्त 2024 में हुई जब उसने जनरल फैज हमीद को गिरफ्तार करवाया।
फैज हमीद को "हाउसिंग स्कीम घोटाले" और "भ्रष्टाचार" के आरोपों में कोर्ट-मार्शल के लिए कैद गया। लेकिन यह सिर्फ "भ्रष्टाचार विरोधी अभियान" नहीं था। असली मकसद था बाजवा गुट को कमजोर करना।
फैज हमीद बाजवा के करीबी और "दाहिने हाथ" थे, और उन्हें हटाकर मुनीर ने यह संदेश दिया: "मेरे शासनकाल में बाजवा का कोई समर्थक सुरक्षित नहीं है।"
अब नदीम अंजुम की बारी है। वे भी बाजवा के करीबी थे, और शायद ज्यादा करीबी। नदीम अंजुम ने 2021 में ISI को चलाया, जो एक बेहद संवेदनशील पद है। इस दौरान उनके पास अनगिनत "राज" आ गये- सरकार के, सेना के, जनरलों के, राजनेताओं के, और यहां तक कि मुनीर के भी।
लेकिन असली समस्या यह है कि नदीम अंजुम ने हाल ही में एक "खतरनाक कदम" उठाया है, जो मुनीर को बेचैन कर रहा है। पढ़े अगले अंक में
साभार
Manoj Kumar

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