इंडिगो पर कांग्रेस की मेहरबानियां: एक घोटाले की कहानी
2004 के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के कार्यकाल के दौरान इंडिगो (Indigo) एयरलाइन के उत्कर्ष के पीछे कांग्रेस की मेहरबानियों की कहानी एक घोटाले की दास्तान है,
जिसमें सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और राहुल गांधी जैसे शीर्ष नेताओं के नाम शामिल हैं।
एयर इंडिया का पतन एक सोची-समझी नीति थी जिसका उद्देश्य इंडिगो के लिए बाज़ार में एकाधिकार (Monopoly) स्थापित करना और कांग्रेस नेतृत्व को वित्तीय लाभ पहुँचाना था। कि कैसे कांग्रेस ने अपने शासनकाल में इंडिगो को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी एयरलाइंस को नुकसान पहुंचाया।
विलय का खेल
2004 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद, प्रफुल्ल पटेल, जो एनसीपी कोटे से मंत्री बने थे, ने एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के विलय की प्रक्रिया शुरू की। इस विलय के पीछे का उद्देश्य एयर इंडिया को मजबूत करना नहीं था, बल्कि इंडिगो को फायदा पहुंचाना था।
बोइंग और एयरबस से सौदा
विलय के बाद, एयर इंडिया ने 111 विमान खरीदने का सौदा किया, जिसमें बोइंग से 68 और एयरबस से 43 विमान शामिल थे। इस सौदे की कीमत लगभग 70,000 करोड़ रुपये थी। सीबीआई ने बाद में इस सौदे की जांच की और पाया कि यह बिना पारदर्शिता के किया गया था, जिससे एयर इंडिया पर 22,000 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज आ गया।
इंडिगो को फायदा
विलय और विमान खरीद के सौदे के बाद, इंडिगो ने अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई और एयर इंडिया को नुकसान पहुंचाया। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार, विलय के बाद एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति खराब हो गई और घाटा बढ़ गया।
नीरा राडिया टेप्स
नीरा राडिया टेप्स से पता चलता है कि इंडिगो को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी नीतियों को बदला गया था। इन टेप्स में यह बात सामने आई है कि प्रफुल्ल पटेल और अन्य कांग्रेस नेताओं ने इंडिगो के हितों को बढ़ावा देने के लिए काम किया था।
इंडिगो पर कांग्रेस की मेहरबानियों की कहानी एक घोटाले की दास्तान है, जिसमें शीर्ष नेताओं के नाम शामिल हैं। यह कहानी बताती है कि कैसे कांग्रेस ने अपने शासनकाल में इंडिगो को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी एयरलाइंस को नुकसान पहुंचाया। इस घोटाले की जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

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