"सफलता के शिखर से आतंक की गहराई तक: ज़ुबैर हंगरगेकर का घिनौना पतन"
मशहूर IT कम्पनी "Mphasis" के सीनियर क्वालिटी अश्योरेंस इंजीनियर ज़ुबैर हंगरगेकर को महाराष्ट्र ATS ने अल-कायदा से जुड़े होने और आतंकी हमलों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।
यह केवल एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक ऐसे युवा के जीवन के अविश्वसनीय पतन की कहानी है, जो कि मुस्लिम समाज की आस्था और उम्मीदों का प्रतीक बन सकता था।
ज़ुबैर सोलापुर में एक समृद्ध परिवार में पैदा हुआ, जहाँ उसे जीवन की हर सुविधा और बेहतरीन शिक्षा मिली। अपने स्कूल और कॉलेज जीवन में लगातार टॉप किया, बीटेक की डिग्री हासिल की और आईटी क्षेत्र में वरिष्ठ गुणवत्ता आश्वासन इंजीनियर के रूप में पुणे में काम किया।
उसके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उसने 15 से अधिक वर्षों तक ETL, BI टेस्टिंग और पायथन आधारित ऑटोमेशन में योगदान दिया। केवल अकादमिक रूप से उत्कृष्ट नहीं, बल्कि कॉलेज क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहा ज़ुबैर। उसकी पहचान अपने सहपाठियों, सहकर्मियों और पड़ोसियों में एक शांत, गंभीर और लक्ष्य-उन्मुख व्यक्ति की थी, जिसके चमत्कारिक भविष्य की कोई सीमा नहीं लग रही थी।
गत 7 अक्टूबर को पुणे में महाराष्ट्र ATS ने कई स्थानों पर छापे मारे, जिसमें कोंढवा, खड़क, वानवड़ी, खडकी और भोसरी जैसे इलाके शामिल थे। इस दौरान 19 लैपटॉप और 40 मोबाइल फोन मुख्य रूप से "ज़ुबैर हंगरगेकर" और अन्य 18 संदिग्धों के घरों और कार्यस्थलों से बरामद किए गए थे।
लगभग तीन सप्ताह की निगरानी और फॉरेंसिक जांच के बाद, 27 अक्टूबर को, पुणे के कोंढवा इलाके से ज़ुबैर को गिरफ्तार किया गया। उन पर अल-कायदा से संबंध रखने और नवयुवकों को आतंकी विचारधारा के लिए रैडिकलाइज करने का आरोप हैं।
उसके आवास पर छापे के दौरान आतंकवादी प्रचार सामग्री, डिजिटल लिटरेचर और रैडिकलाइजेशन उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। उसे अनधिकृत गतिविधि अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया और 4 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
ATS के अनुसार, ज़ुबैर महाराष्ट्र के कई शहरों में आतंकी हमलों की योजना बना रहा था। छापे से पहले और बाद में कई अन्य संदिग्धों को भी रेलवे स्टेशनों पर रोका गया, जिनमें पुणे रेलवे स्टेशन से चेन्नई एक्सप्रेस में चार लोगों को गिरफ्तार करना शामिल है।
एक चिंताजनक बात यह है कि हर सरकारी सुविधा से लाभान्वित उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त और आर्थिक रूप से संपन्न मुस्लिम युवा भी डिजिटल रैडिकलाइजेशन का शिकार हो देश के साथ गद्दारी कर सकते हैं, जो आधुनिक आतंकवाद का एक नया चेहरा है।
ज़ुबैर की एक ही पत्नी और दो बच्चे हैं, जो उनके पुणे के आवास पर रहते हैं। छापे के बाद उनके एक दोस्त को भी पूछताछ के लिए रोका गया, जो उसके साथ चेन्नई में एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने गया था।
यह विरोधाभासी चित्र उसके जीवन की दोहरी प्रकृति को उजागर करता है—एक ओर बहुराष्ट्रीय कंपनी का एक सफल पेशेवर और परिवारिक व्यक्ति, तो दूसरी ओर एक आतंकी नेटवर्क के संचालक के रूप में।
ऐसे में क्या देश अब कभी भी ऐसे उच्च शिक्षित, और प्रतिष्ठित कंपनियों तथा उच्च सरकारी पदों पर काम करने वाले मुसलमानों पर भरोसा कर पायेगा।
क्या हो गया है मुसलमानों को कहाँ हैं वो इस्लाम के अलंबरदार मौलाना और वो बैरिस्टर,इसके पहले कि पूरी कौम ही देश की नफरत का शिकार हो जाये क्यूँ नहीं संभालते इनको ?
ज़ुबैर हंगरगेकर का मामला भारतीय समाज के लिए एक चेतावनी है कि आतंकवाद की जड़ें अब धनाढ्य घरों और उच्च शिक्षित वर्ग में भी पहुँच चुकी हैं। एक शीर्ष छात्र, क्रिकेट कप्तान और सात अंकों के वेतन वाले आईटी पेशेवर से अल-कायदा का ऑपरेटिव बनना एक नाटकीय पतन है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

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