यूपी के पहले मुख्यमंत्री की तीन शादियों का अनोखा सफर
गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर, 1887 को अल्मोड़ा, उत्तराखंड में हुआ था। उनके पिता का नाम मानधाता पंत था। पंत ने अपनी शिक्षा अल्मोड़ा और नैनीताल में पूरी की और बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की।
पहली शादी (12 साल की उम्र में)
गोविंद बल्लभ पंत की पहली शादी महज 12 साल की उम्र में हुई थी। उनकी पहली पत्नी का नाम गंगा देवी था। इस शादी से उन्हें एक बच्चा भी हुआ, लेकिन 1909 में जब उनका बच्चा हुआ, तो गंगा देवी की मौत हो गई।
दूसरी शादी (1912 में)
गोविंद बल्लभ पंत ने 1912 में दूसरी शादी की। उनकी दूसरी पत्नी का नाम नहीं पता है, लेकिन दो साल बाद ही उनकी दूसरी पत्नी का भी निधन हो गया।
तीसरी शादी (1916 में)
फिर 1916 में गोविंद बल्लभ पंत ने तीसरी बार शादी की। उनकी तीसरी पत्नी का नाम पुरुषोत्तमी देवी थी। इस शादी से उन्हें तीन बच्चे हुए। यह शादी 45 साल तक चली, जब तक पंत का निधन नहीं हो गया।
राजनीतिक जीवन
गोविंद बल्लभ पंत ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया। वे 1935 में यूपी के मुख्यमंत्री बने और 1937 तक इस पद पर रहे। बाद में वे भारत के गृह मंत्री भी बने।
उपलब्धियाँ
गोविंद बल्लभ पंत की उपलब्धियों में शामिल हैं:
ज़मींदारी प्रथा का उन्मूलन
हिंदू कोड बिल पारित करना
हिंदू महिलाओं को तलाक और पैतृक संपत्ति में अधिकार दिलाना
सम्मान
गोविंद बल्लभ पंत को 1957 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
निधन
1960 में दिल का दौरा पड़ने के बाद गोविंद बल्लभ पंत की सेहत खराब हुई और 7 मार्च, 1961 को 74 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।


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