चंबल में कहावत है कि आदमी खत्म हो जाते हैं पर दुश्मनी खत्म नहीं होती। सिहोनिया थाना क्षेत्र के सांगौली गांव में चार दिन पहले सोते हुए 76 साल के बुजुर्ग की हत्या के मामले में यही कहावत चरितार्थ हो गई। यहां 52 साल पहले हुई हत्या का बदला लेने के लिए तीसरी पीढ़ी के युवक ने बुजुर्ग की गोली मारकर हत्या की थी। पुलिस ने हत्या आरोपित को पकड़ लिया और वह कट्टा भी जब्त कर लिया है, जिससे बुजुर्ग को गोली मारी गई थी।
गौरतलब है, सांगौली गांव के 76 वर्षीय रामाधार सिंह पुत्र रामचरण सिंह तोमर 9-10 जून की रात घर अपने खेत में खटिया पर सो रहे थे, जहां सोते समय गर्दन में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। गेत से रामाधार का घर 500 मीटर दूर है। 10 जून को तड़के 6 बजे के करीब स्वजन मवेशियों को चारा डालने गया, जब बुजुर्ग रामाधार का खटिया पर खून से सना शव देखा। इस अंधे कत्ल का खुलासा करते हुए एएसपी डॉ. अरविंद सिंह ने बताया, कि बुजुर्ग रामाधार की हत्या गांव के ही पुष्पेंद्र पुत्र विजेंद्र सिंह तोमर ने की थी।
सिहोनिया थाना प्रभारी धर्मेंद्र गौर ने बताया, कि करीब 52 साल पहले आरोपित पुष्पेंद्र सिंह के दादा जयसिंह तोमर की हत्या हो गई थी। पुष्पेंद्र के दादा की हत्या रामाधार सिंह तोमर के भाई बटरी सिंह व चाचा दनू सिंह ने की थी। इसी हत्या का बदला लेने के निए पुष्पेंद्र सिंह के मन में बदले की भावना जागी।
आरोपित पुष्पेंद्र सिंह तोमर गांजा व शराब के नशे का आदी है, नशे की हालत में उसके सिर पर दादा की हत्या का बदला लेने की भावना ऐसी सवार हुई, कि रामाधार सिंह को अकेला पाकर रात में उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद से ही आरोपित गांव से गायब था, जिस पर पुलिस को संदेह हुआ और पकड़ने के बाद पूछताछ की गई तो उसने हत्या की बात कुबूल कर ली।
दादा के 55 साल पुराने कट्टे से मारी थी गोली
हत्या आरोपित पुष्पेंद्र सिंह ने हत्या की बात कुबूल करते हुए वह कट्टा भी पुलिस को जब्त करवा दिया, जिससे उसने रामाधार सिंह तोमर को गोली मारी। पुलिसकर्मी इस कट्टे को देखकर हैरान रह गए। वर्तमान में आने वाले देसी कट्टों से वजन में चार गुना और आकार लगभग तीन गुना बड़ा था। छानबीन में पुलिस को पता चला, कि यह कट्टा पुष्पेंद्र सिंह के उसी दादा जयसिंह तोमर का है जिनकी हत्या हुई थी। पुष्पेंद्र सिंह व उसके स्वजन साढ़े पांच दशक से इस कट्टे को छिपाकर रखे हुए थे।
दो हत्याएं हुईं, जिनमें मृतक रामाधार निर्दोष था
सिहोनियां थाना प्रभारी ने बताया कि करीब 52 साल पहले गांव में दो मर्डर हुए थे। पहली हत्या मृतक रामाधार सिंह के पिता रामचरण की हुई थी, जिसके आरोप जयसिंह तोमर, श्रीराम तोमर व हीरासिंह तोमर पर लगे थे, केस भी दर्ज हुआ था।
कुछ महीने बाद रामचरण की हत्या का बदला लेने के लिए रामचरण के भाई दनू सिंह व बेटे बटरी सिंह ने जयसिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। इस दौहरे हत्याकांड में उन रामधार सिंह तोमर का कहीं नाम नहीं था, जिन्हें 54 साल पहले हुई जयसिंह तोमर की हत्या का बदला लेने के लिए निर्मम तरीके से मार दिया गया।

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