खाकी, खादी अब भगवा
अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर ट्रेड बन चुके पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय इन दिनों प्रशासनिक सेवा से हटके आस्था में लीन होते दिख रहे हैं।
वीआरएस लेने के बाद से आध्यात्म में रमे हैं पूर्व डीजीपी
आइपीएस से वीआरएस लेने के बाद कुछ दिनों तक राजनीति में सक्रिय रहे गुप्तेश्वर पांडेय बीते कुछ दिनों से पूरी तरह आध्यात्म में रमे हुए हैं। एक बड़े अधिकारी के इस अवतार की काफी चर्चा हुई। इस बाबत जब पूर्व पुलिस महानिदेशक से बात की गई तो उनका कहना था कि वे महज 14 वर्ष की उम्र से अलग-अलग अवसरों पर कथावाचन करते रहे हैं। शुरू से उनकी रुचि आध्यात्म में रही है। अपनी सेवा अवधि में भी वे इस तरह के कार्यक्रम में सक्रिय रहे। हालांकि उस दौरान कथावाचन की अनुमति नहीं थी। इसलिए तब वे कथावाचन नहीं करते थे। गुप्तेश्वर पांडेय कहते हैं कि ईश्वर के चरणों में जगह पाना ही मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य है।
राजनीति करना आसान नहीं है
बातचीत में उन्होंने कहा कि राजनीति के लिए जो योग्यताएं चाहिए शायद वो उनमें नहीं थी इसलिए वह फेल हो गए. उन्होंन कहा कि दूर से राजनीति जितनी आसान लगती है वह उतनी है नहीं. हर कोई चाहता है कि वह विधायक और मंत्री बने लेकिन उसके लिए बहुत ही ज्यादा योग्यता और बुद्धी होने के साथ साथ धैर्य की जरूरत है जो शायद मुझमें नहीं है.
गुप्तेश्वर पांडेय ने 2009 में बक्सर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए वीआरएस लिया लेकिन टिकट मिला नहीं तो वापस सेवा में आने की अर्जी दी। इसे 9 महीने बाद नीतीश सरकार ने मंजूर कर लिया था। इसके बाद 2020 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने दोबारा वीआरएस ली लेकिन इस बार भी उनके हाथ निराशा आओ लगी।
बचपन से ग्रेजुएशन तक का सफर: गुप्तेश्वर पांडेय का जन्म 1961 में बिहार के बक्सर जिले के गेरुआबंध गांव में हुआ है। वो बचपन से ही भोजपुरी बोलते हैं। उनके पिता एक साधू थे। परिवार में गुप्तेश्वर पांडे से पहले कोई भी स्कूल नहीं गया था। ज्यादा से ज्यादा सबको हस्ताक्षर करना आता था। बता दें की जिस स्कूल में वह पढ़ने के लिए जाते थे। वहां पर बैठने के लिए बेंच भी नहीं होती थी। साइंस और मैथ में कमजोर होने के कारण उन्होंने आर्ट्स से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। एक बात रोचक है कि उन्होंने संस्कृत में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। एमए का सेशन लेट होने के कारण वो यूपीएससी की तैयारी में लग गए।
मातापिता से पुलिस द्वारा बदसलूकी
IRS बनने के बावजूद भी IPS बने: 1986 मे पहले संस्कृत भाषा में यूपीएससी परीक्षा के लिए उपस्थित हुए थे जिसके मुताबिक उन्हें आईपीएस भारतीय राजस्व सेवा आईआरएस (IRS) के लिए चयनित किया गया, लेकिन वो अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं थे। और उनका सपना आईपीएस अफसर बनने का था और उन्होंने फिर दूसरे प्रयास में आईपीएस (IPS) बने। जब गुप्तेश्वर पांडे 10 साल के थे तो उनके घर पर पुलिस वालों ने सेंधमारी थी। हालांकि, उनके परिवार का कोई दोष नहीं था। लेकिन तलाशी के दौरान उनके घर को निशाना बनाया गया था। साथ ही पुलिस वालों ने गलत तरीके से बातचीत की थी। जिसका असर उनके ज़हन में काफी लंबे समय तक रहा। ऐसे में वह कभी भी एक पुलिसवाले नहीं बनना चाहते थे। तब से ही पुलिस के प्रति उपजे नकारात्मक इमेज को दूर करने के लिए वो इस क्षेत्र में आए।

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