गोल्ड हॉलमार्किंग के नए नियम सरकार ने लागू कर दिए हैं. इसका सीधा असर ज्वैलर्स पर पड़ेगा लेकिन आम भारतीयों के पास भी बड़ी मात्रा में पुरानी सोने की ज्वैलरी मौजूद है. लिहाजा, अब ऐसे लोग जो ज्वैलरी को गिरवी रख गोल्ड लोन लेते हैं, उन्हें दिक्कत आ सकती है.
नया नियम 15 जून से लागू है. लेकिन सरकार ने शुरुआत में गोल्ड हॉलमार्किंग देश के 256 जिलों में लागू की है. यहां जांच करने वाले हॉलमार्किंग सेंटर हैं. यही नहीं, 40 लाख रुपए तक के सालाना टर्नओवर वाले ज्वैलर्स को अनिवार्य हॉलमार्किंग से छूट दी गई है. साथ ही, 31 अगस्त 21 तक व्यापारियों पर सरकार कार्रवाई नहीं करेगी
गोल्ड हॉलमार्किंग के पीछे सरकार का मकसद है कि ग्राहकों को शुद्ध सोना मिले. उनके साथ गहनों की बिक्री में किसी तरह की ठगी न हो. नए प्रावधानों के बाद बीआईएस हॉलमार्क वाली गोल्ड ज्वैलरी और कलाकृतियां ही बिकेंगी, जो कि सोने के तीन ग्रेड- 14, 18 और 22 कैरेट में होंगी. नए कानून से ग्राहक को ठगा नहीं जा सकेगा और खरीदी जाने वाली हॉलमार्क्ड गोल्ड ज्वैलरी उतने ही कैरेट की होगी, जितने के ग्राहक ने पैसे दिए हैं
गोल्ड हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के बाद एक अहम सवाल यह भी है कि घर में पुराना सोना पड़ा है तो उसका क्या होगा. उसकी बिक्री पर कैसे असर होगा. अमजेरा का कहना है कि गोल्ड हॉलमार्किंग के फैसले का घर में रखे सोने की ज्वैलरी पर कोई फर्क नहीं होने वाला है. वो आसानी से रख सकते हैं. पुरानी ज्वैलरी बिक्री करने पर कोई असर नहीं होगा. वो उसे ज्वैलर्स के यहां बेच सकते हैं. लेकिन, ज्वैलर्स अब बिना हॉलमार्क के सोना नहीं बेच पाएगा.

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