पुलेला गोपीचंद ने जो नैतिक बल और साहस दिखाया, क्या वह साहस क्रिकेटर दिखा सकेंगे!
भारत के एक बैडमिंटन स्टार ने कोकाकोला को बड़ी खामोशी से चुनौती दी. इस स्टार का नाम पुलेला गोपीचंद है. प्रकाश पादुकोण के बाद गोपीचंद दुनिया भर में शटलर की बड़ी ताकत बन कर उभरे. यह वही गोपीचंद हैं, जिन्होंने साइना नेहवाल और पीवी सिंधु जैसे खिलाड़ियों को दुनिया के मानचित्र पर स्थापित किया.
2001 में ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप जीतने के बाद गोपीचंद को नोटिस किया. कोकाकोला ने विज्ञापन के लिए उनसे संपर्क किया और बहुत बड़ी रकम देने का प्रस्ताव किया. लेकिन उस समय तक अपने माता-पिता के साथ किराये के घर में रह रहे पुलेला गोपीचंद ने साफ-साफ मना कर दिया. आमतौर पर बहुत शांत रहनेवाले इस खिलाड़ी ने इस बात को कोई तूल नहीं दिया, न ही किसी तरह की पब्लिसिटी की. मीडिया तक को इस बात का पता दूसरे स्रोतों से लगा.
पुलेला गोपीचंद को मिले अवार्ड
गोपीचंद 1999में अर्जुन अवार्ड से 2001 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरुष्कार व 2005 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया ।उनकी शानदार टीम कोचिंग के लिए 2009 में द्रौणाचार्य व 2014 में
एक इंटरव्यू में उनसे इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा, “चूंकि मैं खुद सॉफ्ट ड्रिंक नहीं पीता, मैं नहीं चाहूंगा कि कोई दूसरा बच्चा मेरी वजह से ऐसा करे. मैं कोई चिकित्सक नहीं हूं, लेकिन मुझे पता है कि सॉफ्ट ड्रिंक्स स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं और मैंने अपने मैनेजर को इस बारे में साफ-साफ कह रखा है कि मैं किसी भी ऐसे प्रॉडक्ट के साथ नहीं जुड़ूंगा, चाहे वह सॉफ्ट ड्रिंक हो या सिगरेट या शराब.” पैसे को लेकर भी उनका दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट था: “मेरे लिए ज़्यादा महत्व उसूलों का है और मैं किसी भी कीमत पर अपने उसूलों को पैसे के तराज़ू पर नहीं तोल सकता.”
गोपीचंद ने जो नैतिक बल और साहस दिखाया, क्या वह नैतिकता पेप्सी और कोक का लोगो लगाकर खेलनेवाले हमारे क्रिकेट सितारे कभी दिखा सकेंगे?
भारत के एक बैडमिंटन स्टार ने कोकाकोला को बड़ी खामोशी से चुनौती दी. इस स्टार का नाम पुलेला गोपीचंद है. प्रकाश पादुकोण के बाद गोपीचंद दुनिया भर में शटलर की बड़ी ताकत बन कर उभरे. यह वही गोपीचंद हैं, जिन्होंने साइना नेहवाल और पीवी सिंधु जैसे खिलाड़ियों को दुनिया के मानचित्र पर स्थापित किया.
2001 में ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप जीतने के बाद गोपीचंद को नोटिस किया. कोकाकोला ने विज्ञापन के लिए उनसे संपर्क किया और बहुत बड़ी रकम देने का प्रस्ताव किया. लेकिन उस समय तक अपने माता-पिता के साथ किराये के घर में रह रहे पुलेला गोपीचंद ने साफ-साफ मना कर दिया. आमतौर पर बहुत शांत रहनेवाले इस खिलाड़ी ने इस बात को कोई तूल नहीं दिया, न ही किसी तरह की पब्लिसिटी की. मीडिया तक को इस बात का पता दूसरे स्रोतों से लगा.
पुलेला गोपीचंद को मिले अवार्ड
गोपीचंद 1999में अर्जुन अवार्ड से 2001 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरुष्कार व 2005 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया ।उनकी शानदार टीम कोचिंग के लिए 2009 में द्रौणाचार्य व 2014 में पदमविभूषण पुरुष्कार से सम्मानित किया गया
एक इंटरव्यू में उनसे इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा, “चूंकि मैं खुद सॉफ्ट ड्रिंक नहीं पीता, मैं नहीं चाहूंगा कि कोई दूसरा बच्चा मेरी वजह से ऐसा करे. मैं कोई चिकित्सक नहीं हूं, लेकिन मुझे पता है कि सॉफ्ट ड्रिंक्स स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं और मैंने अपने मैनेजर को इस बारे में साफ-साफ कह रखा है कि मैं किसी भी ऐसे प्रॉडक्ट के साथ नहीं जुड़ूंगा, चाहे वह सॉफ्ट ड्रिंक हो या सिगरेट या शराब.” पैसे को लेकर भी उनका दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट था: “मेरे लिए ज़्यादा महत्व उसूलों का है और मैं किसी भी कीमत पर अपने उसूलों को पैसे के तराज़ू पर नहीं तोल सकता.”


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