नाम न छापने के शर्त पर एक सूत्र ने बताया कि 2012-13 या उससे पहले बनाई गई पॉलिसी में बेशक यह बात कही गई थी कि महामारी घोषित होने पर बीमा कंपनी बिमारी का क्लेम नहीं देगी लेकिन 2012 के बाद आए प्रोडक्ट (यानी पॉलिसी) में ऐसा कोई छूट नहीं है कि जिससे बीमा कंपनियां क्लेम देने से मना कर सके। यानी किसी व्यक्ति को कोरोनावायरस हो जाता है तो बीमा कंपनियां उसे क्लेम देने से मना नहीं कर सकती।
पॉलिसी का 30 दिन का वेटिंग पीरियड निकलना जरूरी
वहीं एचडीएफसी एग्रो हेल्थ इंश्योरेंस के अधिकारी ने बताया कि कोई भी व्यक्ति जिसने किसी भी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस ले रखा हो, वह कोरोना के इलाज का क्लेम लेने के लिए पात्रता रखता है लेकिन शर्त यह है कि पॉलिसी का 30 दिन का वेटिंग पीरियड खत्म हो गया हो और वह हॉस्पिटल में एडमिट होकर कोरोनावायरस का इलाज करा रहा हो।
उन्होंने आगे बताया कि, हेल्थ पॉलिसी में कंडिशन यह होती है कि उसमें पहले दिन से एक्सीडेंटल कवरेज और 30 दिन बाद से सभी बिमारियों का कवरेज मिलता है। चूंकि कोरोनावायरस एक वायरल इंफेक्शन है ऐसे में बीमाधारक को हर हाल में क्लेम मिलेगा। वहीं महामारी अगर ज्यादा फैल जाती है और हॉस्पिटल में जगह न होने के कारण डॉक्टर ये लिख कर दे दे कि इनके लिए बेड की व्यवस्था नहीं है ऐसी स्थिति में मरीज को घर पर इलाज की सुविधा भी मिलेगी।

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