डॉ संजीव वर्मा
मेरठ के आरटीओ जाकर एक सुखद अहसास हुआ। वैसे तो यूपी का हर क्षेत्र में बड़ा नाम है फिर भी यूपी एक मामले में देश में सबसे आगे है और वह है सड़क दुर्घटनाएं...
कारण बहुत से हैं...
सड़क पर आते ही सबको आगे निकलने की जल्दी लगी रहती है। सबके फोन तभी बजते हैं जब वह सड़क पर होते हैं। हेलमेट लगाना और सीट बेल्ट बांधना तो जैसे इज्जत में बट्टा लगना है यहां के लोगों की। दारू पीकर भैंसा बुग्गी चलाई जा सकती है तो मोटर कार क्यों नहीं? सड़क के गड्ढों से डरकर गाड़ी धीमी चलाना स्वीकार नहीं। इंसयूरेन्स वो लोग कराया करते हैं जिन्हें चोट लगने या मरने से डर लगता है। मुँह से बीड़ी सिगरेट का धुआं निकल रहा है तो गाड़ी से भी धुंआ निकलना चाहिए कि नहीं। ड्राइविंग लाइसेंस तो हम माँ के पेट से ही लेकर आये हैं तो आरटीओ कौन होता है हमें लाइसेंस देने वाला!!!
मेरठ की शान में और भी बहुत से कसीदे पढ़े जा सकते हैं। मगर जो हमने आज देखा वह वास्तव में अनोखा था।
मेरठ आरटीओ शायद देश का पहला आरटीओ है जहाँ लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस देने से पहले सभी अभ्यर्थियों को लगभग 1 घण्टे की एक क्लास दी जाती है। जिसमें एक इंस्ट्रक्टर सड़क दुर्घटनाओं की कुछ वीडियो फुटेज दिखाते है फिर अभ्यर्थियों से पूछते हैं कि यह दुर्घटना क्यों हुई और गलती किसकी है???
इसके बाद वह विभिन्न यातायात दिशा निर्देशों और चिह्नों से सभी को अवगत करवाते हैं। दाएं बाएं मोड़ से लेकर स्पीड लिमिट तक सभी आदेशात्मक, चेतावनी या फिर सूचनार्थ दिशा निर्देश।
एक बात मुझे बहुत ही इंटरेस्टिंग लगी। आप बाएं और दाएं हाथ को कैसे पहचानोगे?
हाथ के अंगूठे और अंगूठे के ठीक बराबर वाली उंगली को एक साथ मिलाने पर अगर अंग्रेजी के छोटे बी (b) की आकृति बने तो वह बायां हाथ होगा और अगर छोटे डी(d) की आकृति बने तो वह दायाँ हाथ होगा। गज़ब भाई अमित तिवारी जी (इंस्ट्रक्टर) गज्जब।
काश सभी आरटीओ इस तरह की पहल करें तो निश्चित रूप से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकेगी।


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