नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली की सुरभि करवा ने जो किया, वो तेजतर्रार मोदी सरकार भी नहीं कर पाई। सुरभि ने सुप्रीम कोर्ट की महिला कर्मचारी के यौन उत्पीड़न का विरोध किया, और मामला सुर्खियों में ला दिया। वो भी गांधीवादी तरीके से।
सुरभि एलएलएम में यूनिवर्सिटी टॉपर है। उसे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के हाथों अवार्ड लेना था, पर उसने समारोह का बहिष्कार किया। बोली, मुझे लगा कि एक वकील के तौर पर मुझे संवैधानिक मान्यताओं का पालन और रक्षा करनी है जिसके लिए चीफ जस्टिस ने भी कहा तो मैं अवार्ड कैसे ले सकती थी। गोगोई खुद इस कर्मचारी के उत्पीड़न के आरोपी हैं। सुरभि ने अवार्ड ठुकराया नहीं, बल्कि गोगोई के हाथों ग्रहण करना उसे उचित नहीं लगा।
19 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व स्टाफ ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को एक 29 पेज का हलफनामा भेजा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मुख्य न्यायाधीश ने उसके साथ अनुचित यौन संबंध बनाए थे और जब उसने विरोध किया तो उसे सेवा से बर्खास्तगी सहित अन्य बर्बर कार्रवाई का सामना करना पड़ा। इसके बाद अगले दिन मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक बुलाई गई। मुख्य न्यायाधीश ने आरोपों से इनकार किया और इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला करने का प्रयास करार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में आदेश दिया कि यह देखने के लिए एक जांच आवश्यक थी कि क्या आरोप एक 'बड़ी साजिश' का परिणाम थे। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों की जांच के लिए जस्टिस एस ए बोबडे, इंदु मल्होत्रा और इंदिरा बनर्जी के इन-हाउस पैनल का गठन किया। शिकायत करने वाली महिला ने यह कहते हुए कि इन-हाउस कमेटी का माहौल "भयावह" था, किसी भी तरह की कार्यवाही में भाग नहीं लेने का फैसला किया। एक प्रेस विज्ञप्ति में, महिला ने कहा कि उसने "सुप्रीम कोर्ट के तीन माननीय न्यायाधीशों की उपस्थिति में और वकील या समर्थन वाले व्यक्ति के बिना" वहां डर और घबराहट महसूस की।" शिकायतकर्ता ने कहा कहा था" मुझे लगा कि मुझे इस समिति से न्याय मिलने की संभावना नहीं है और इसलिए मैं अब 3 न्यायाधीशों की समिति की कार्यवाही में भाग नहीं ले रही हूं"। शिकायतकर्ता द्वारा पूछताछ से हटने के बावजूद, पैनल ने जांच आगे बढ़ाई और भारत के मुख्य न्यायाधीश से पूछताछ की, जिन्होंने आरोपों से इनकार किया। 6 मई को सुप्रीम कोर्ट सेकेट्री जनरल ने बताया कि इन-हाउस पैनल ने मामले में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को क्लीन चिट दे दी है। रिपोर्ट की सामग्री को न तो शिकायतकर्ता के साथ साझा किया गया और न ही इसे सार्वजनिक किया गया।
वाकई, गोगोई ने इस महिला के अधिकारों का हनन किया है। क्यों पुलिस जांच नहीं कराई और जजों की कमेटी बनाकर क्लीनचिट ले ली? सरकार दिल्ली पुलिस को मामले की जांच का आदेश क्यों नहीं दे पाई?
सुरभि को इस साहस के लिए सलामी देने का मन है। शाबाश...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें