जब गाड़ियां कम बिकती हैं , महंगी ब्रांडेड चीजें कुछ दिन कम बिकते हैं तो एसी में बैठे धनाढ्यों, स्वयम्भू अर्थशास्त्रियों और कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों के बीच चिंता की लहर दौड़ जाती है । देश मे जीडीपी नीचे जा रही है , इकॉनमी बर्बाद हो रही है फैशन टॉक बन जाता है ।
पर उसके बाद क्या होगा ? यही लोग फिर मिडिल क्लास के लिए छाती पिटेंगे...हाय हाय मिडिल क्लास तो बेचारा मरा जा रहा है, गृहणियों का बजट बिगड़ गया है, हाउसिंग लोन की क़िस्त नहीं चुका पा रहे आदि आदि
मुझे लगता है कि सरकार और रिज़र्व बैंक को महंगाई दर ढाई तीन प्रतिशत के बजाय 5 प्रतिशत के आस स्थिर रखने की कोशिश करनी चाहिये यही देश के लिये मुफीद होगा ।
इकॉनमी को कभी एक चीज कम या ज्यादा बिकने से फर्क नही पड़ता ये तो हर साल होता है । कभी एक सेक्टर में बूम आया कभी दूसरे में मंदी और इकॉनमी और रोजगार ऐसे ही चलते हैं बस जरूरी है सक्षम और संवेदनशील नेतृत्व की जो हमेशा हर पहलू पर ध्यान दे और मुझे लगता है कि हमारे पास ऐसा नेतृत्व है इसलिए चिंता की जरूरत नही है बस सभी देश और समाज को अपने अपने तरीक़े से रचनात्मक योगदान देते रहने का प्रयत्न करें ।
मनोज कुमार मिश्र


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